रांची : झारखंड में आगामी 23 फरवरी का दिन राज्य सरकार और प्रशासन के लिए किसी बड़ी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होने वाला है। एक तरफ जहाँ राज्य निर्वाचन आयोग ने चार साल के लंबे इंतजार के बाद नगर निकाय चुनाव के लिए मतदान की तिथि 23 फरवरी तय की है, वहीं दूसरी ओर इसी दिन झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) की महत्वपूर्ण बोर्ड परीक्षाएं भी निर्धारित हैं। एक ही दिन दो विशाल आयोजनों के टकराने से छात्र, अभिभावक और शिक्षा जगत से जुड़े लोग गहरे तनाव में हैं।
अव्यवहारिक फैसले पर अभिभावकों का आक्रोश
झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने इस स्थिति को ‘अव्यवहारिक’ और ‘छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निकाय चुनाव और बोर्ड परीक्षा, दोनों ही ऐसे आयोजन हैं जिनमें भारी संख्या में सुरक्षा बल, प्रशासनिक अमले, परिवहन के साधन और सरकारी भवनों (विशेषकर स्कूलों) की आवश्यकता होती है। जब स्कूल मतदान केंद्र बन जाएंगे और शिक्षक चुनाव ड्यूटी में तैनात होंगे, तो परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्था कौन संभालेगा?
छात्रों के सामने चुनौतियां ही चुनौतियां
चुनाव के दिन अक्सर यातायात व्यवस्था बाधित रहती है और कई इलाकों में सुरक्षा के कड़े घेरे होते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि छात्र समय पर अपने परीक्षा केंद्र तक कैसे पहुंच पाएंगे? अभिभावकों का मानना है कि चुनाव के शोर-शराबे और प्रशासनिक हलचल के बीच छात्र परीक्षा के लिए आवश्यक शांति और एकाग्रता नहीं बना पाएंगे। इसके अतिरिक्त, यदि शिक्षक चुनाव में व्यस्त रहे, तो परीक्षा की निष्पक्षता और मॉनिटरिंग पर भी सवालिया निशान लग सकते हैं।
समाधान की मांग
एसोसिएशन ने अब सीधे तौर पर राज्य सरकार, जैक बोर्ड और राज्य निर्वाचन आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मांग है कि या तो चुनाव की तिथि आगे बढ़ाई जाए या बोर्ड परीक्षा के शेड्यूल में संशोधन किया जाए। फिलहाल, गेंद सरकार के पाले में है और हजारों छात्र इस असमंजस में हैं कि वे 23 फरवरी को परीक्षा केंद्र जाएंगे या फिर उनके मोहल्ले में हो रहे मतदान के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।



