AYODHYA: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। हर दिन लाखों श्रद्धालुओं द्वारा पूरी आस्था के साथ चढ़ाए जाने वाले सोने, चांदी और नकदी को गिनने वाले कर्मचारियों पर ही करोड़ों रुपये की चोरी करने का गंभीर आरोप लगा है। यह पूरा मामला तब खुला जब महीने में महज 18 से 20 हजार रुपये कमाने वाले इन मामूली कर्मचारियों द्वारा करोड़ों रुपये की कीमती जमीन और प्लॉट खरीदने की बात सामने आई। इस बड़े खुलासे के बाद पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक हलके में हड़कंप मच गया है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) जांच के कड़े आदेश दे दिए हैं।

यह मामला तब और ज्यादा सुर्खियों में आ गया जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राम मंदिर के चढ़ावे में हुए इस भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए लिखा कि इस षड्यंत्र का मूल बहुत दूर नहीं है और दोषियों के बारे में पता लगाने में यदि पुलिस नाकाम है, तो वे खुद सहायता करने के लिए तैयार हैं। विपक्ष के इस कड़े और हमलावर रुख के बाद सरकार और प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया।

दरअसल, राम मंदिर में दानपात्रों से पैसे निकालने और उनकी गिनती करने के लिए कुछ खास कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। जांच एजेंसियों को सबसे पहले शक तब हुआ जब इन कर्मचारियों की आधिकारिक आमदनी और उनकी वास्तविक संपत्ति में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिला। शुरुआती जांच के दौरान सामने आया कि एक मामूली वेतन पाने वाले कर्मचारी ने करीब डेढ़ करोड़ रुपये की बेशकीमती जमीन खरीद डाली, जबकि दूसरे ने करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट अपने नाम करा लिया। 18 से 20 हजार रुपये की मासिक तनख्वाह वाले कर्मचारियों के पास अचानक इतनी बड़ी रकम कहां से आई, इसी यक्ष प्रश्न ने इस पूरे घोटाले की परतें खोलकर रख दीं।

इस पूरे काले कारनामे में सबसे पहला और मुख्य नाम लवकुश मिश्रा का सामने आया है। लवकुश अयोध्या के पास रुदौली के शुजागंज इलाके के मीनापुर फगौली गांव का रहने वाला है और मंदिर के दानपात्रों से पैसे गिनने का काम करता था। जब छह सदस्यीय संयुक्त जांच टीम उसके घर छापेमारी के लिए पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए। लवकुश के घर से कुल 10 लाख रुपये की मोटी नकदी बरामद हुई, जिसमें से कुछ पैसे घर की अलमारी में और कुछ पैसे बेहद चालाकी से घर के बाहर बने गोबर के ढेर में छिपाकर रखे गए थे। हालांकि, लवकुश के पिता बच्चूलाल ने अपने बेटे का बचाव करते हुए दावा किया है कि उनका बेटा पूरी तरह निर्दोष है और यह रकम उन्होंने अपनी खेती की जमीन गिरवी रखकर जुटाई थी।

मामले के लगातार तूल पकड़ने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मांग पर उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। इस हाई-लेवल जांच टीम के अध्यक्ष लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत बनाए गए हैं, जबकि आईपीएस अफसर किरन एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन को इसका सदस्य नियुक्त किया गया है। एसआईटी को 7 दिनों के भीतर अपनी शुरुआती रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर अंतिम जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। वर्तमान में एसओजी (SOG) ने लवकुश मिश्रा समेत एक अन्य संदिग्ध कर्मचारी को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ शुरू कर दी है। इसके अलावा, मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज और पिछले कई महीनों के वित्तीय रिकॉर्ड्स को भी बारीकी से खंगाला जा रहा है।

इस बड़े घटनाक्रम को लेकर राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे वरिष्ठ भाजपा नेता विनय कटियार ने अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों के संघर्ष और बलिदान का पावन प्रतीक है, इसलिए मंदिर के चढ़ावे में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी श्रद्धालु की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा और नियमों के तहत सबसे सख्त कदम उठाए जाएंगे। दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इस संवेदनशील मुद्दे पर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के इस्तीफे की मांग की है। सपा नेता तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक ट्रस्ट के पदाधिकारियों को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से हट जाना चाहिए ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।

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