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साड़ी से आगे बढ़ा भागलपुरी सिल्क, जीविका दीदियों ने बदला अंदाज

जीविका दीदियों को सिल्क बुनाई, डिजाइन और फिनिशिंग का प्रशिक्षण देकर भागलपुरी सिल्क को नए उत्पादों और बाजारों से जोड़ने की पहल की जा रही है।

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Patna/Bhagalpur: बिहार की जीविका दीदियां भागलपुर की सदियों पुरानी हैंडलूम सिल्क की परंपरा को नए बाजार के अनुरूप आगे बढ़ाने में जुटी हैं। स्वयं सहायता समूहों के जरिए बुनकर परिवारों की महिलाओं को सिल्क बुनाई, आधुनिक डिजाइन, रंग संयोजन, फिनिशिंग और उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही भागलपुरी सिल्क को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल भी शुरू की गई है।

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भागलपुरी सिल्क को मिल रहा नया स्वरूप

भागलपुर को देशभर में ‘सिल्क सिटी’ के रूप में पहचान मिली हुई है। भागलपुरी रेशम की खास बुनावट, प्राकृतिक चमक और शिल्पकला इसकी पहचान हैं। पारंपरिक हथकरघा बुनकर परिवार लंबे समय से कम आय, पुराने तकनीकी संसाधनों, सीमित बाजार पहुंच और बिचौलियों पर निर्भरता जैसी चुनौतियों का सामना करते रहे हैं। जीविका के स्वयं सहायता समूहों और उत्पादक समूहों के जरिए महिलाओं को संगठित कर इन चुनौतियों से निपटने की पहल की जा रही है।

प्रशिक्षण से मिली कारोबार की नई जानकारी

जीविका दीदियों को सिल्क व्यवसाय से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रशिक्षण के जरिए दी जा रही हैं। इसमें उन्नत बुनाई तकनीक, करघा संचालन, रंगाई और फिनिशिंग के साथ आधुनिक डिजाइन और पैटर्न विकसित करने का प्रशिक्षण शामिल है। महिलाओं को बचत, आंतरिक ऋण और बैंक ऋण की सुविधा से भी जोड़ा गया है। इससे वे कच्चे माल, करघे, उपकरण और कार्यशील पूंजी में निवेश कर पा रही हैं। आर्थिक सहयोग मिलने से बुनकर परिवारों को पूरे वर्ष बुनकरी का काम जारी रखने में मदद मिल रही है।

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साड़ी से आगे बढ़े भागलपुरी सिल्क के उत्पाद

भागलपुरी हैंडलूम सिल्क को नई पहचान देने के लिए उत्पादों में विविधता लाई गई है। अब सिल्क साड़ी के साथ दुपट्टे, स्टोल, ड्रेस मटेरियल और होम फर्निशिंग जैसे उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग और लेबलिंग के साथ बेहतर मार्केटिंग पर भी जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य जीविका दीदियों के बनाए भागलपुरी सिल्क उत्पादों को बाजार में अलग पहचान दिलाना है।

ई-कॉमर्स से जोड़ने की पहल

महिलाओं को उत्पादक समूहों और उत्पादक कंपनियों के रूप में संगठित किए जाने से रेशम के धागे और अन्य कच्चे माल की सामूहिक खरीद संभव हुई है। इससे उत्पादन लागत कम करने और सामूहिक विपणन के जरिए बेहतर कीमत हासिल करने में मदद मिली है। जीविका ने इन समूहों को प्रदर्शनियों, मेलों, शहरी बाजारों और संस्थागत खरीदारों से जोड़ने की पहल की है। इसके साथ ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए भी बाजार तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही है।

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महिलाओं में बढ़ रहा आत्मविश्वास

इस पहल से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ उनके सामाजिक जीवन पर भी असर पड़ा है। बढ़ी हुई आय से परिवार के पोषण, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। महिलाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता भी विकसित हुई है। महिला सशक्तीकरण, मजबूत संस्थागत ढांचे, उत्पाद की गुणवत्ता और बाजार से जुड़ाव के जरिए भागलपुरी सिल्क को महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यम से जोड़ा जा रहा है।

मास्टर ट्रेनर और उद्यमी बन रहीं महिलाएं

दस्तावेज के अनुसार, कई जीविका दीदियां अब मास्टर ट्रेनर, उद्यमी और सामुदायिक नेता के रूप में भी भूमिका निभा रही हैं। जीविका के स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से भागलपुर की हैंडलूम सिल्क परंपरा को संरक्षित करने के साथ उसे आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की पहल जारी है।

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