World News: बांग्लादेश से इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। मयमनसिंह जिले में 18 दिसंबर की रात एक 25 वर्षीय हिंदू युवक, दीपू चंद्र दास को सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया गया क्योंकि उस पर ईशनिंदा का झूठा आरोप मढ़ा गया था। गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले इस मजदूर को भीड़ ने न केवल बेरहमी से पीटा, बल्कि एक पेड़ से बांधकर जिंदा जला दिया। अब इस मामले में बांग्लादेश पुलिस अपनी नाकामी छुपाने के लिए ‘देरी से सूचना मिलने’ का बहाना बना रही है।
फर्जी इस्तीफे का खेल और फैक्ट्री प्रबंधन की संदिग्ध भूमिका
जांच में खुलासा हुआ है कि फैक्ट्री के मैनेजर आलमगीर हुसैन ने भीड़ को शांत करने के लिए दीपू का एक फर्जी इस्तीफा भी तैयार कर लिया था, ताकि यह दिखाया जा सके कि उसे काम से निकाल दिया गया है। लेकिन नफरत से अंधी हो चुकी भीड़ कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी। शाम 5 बजे से शुरू हुआ यह विवाद रात 9 बजे तक खूनी खेल में तब्दील हो गया। चौंकाने वाली बात यह है कि फैक्ट्री प्रबंधन घंटों तक खुद ही मामला सुलझाने का दावा करता रहा और जब पानी सिर से ऊपर निकल गया, तब पुलिस को फोन किया गया।
10 किलोमीटर लंबा जाम और पुलिस की दलील: ‘हम देर से पहुंचे’
स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें घटना की जानकारी रात 8 बजे के बाद मिली। जब तक पुलिस बल मौके पर पहुंचता, तब तक ढाका-मयमनसिंह रोड पर सैकड़ों की संख्या में उपद्रवी जमा हो चुके थे और 10 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लगा था। पुलिस ने सफाई देते हुए कहा, “अगर हमें समय पर सूचना मिल जाती, तो शायद आज दीपू हमारे बीच जिंदा होता।” हालांकि, इस दलील से स्थानीय हिंदू समुदाय और मानवाधिकार संगठनों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि पुलिस और प्रशासन अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में पूरी तरह विफल रहे हैं।
सबूत के नाम पर शून्य; नफरत की आग में झुलसा बेगुनाह
अभी तक की प्राथमिक जांच में दीपू के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कोई भी प्रमाण नहीं मिला है। स्थानीय लोगों और सहकर्मियों ने भी माना कि उन्होंने दीपू के मुंह से कभी कोई आपत्तिजनक बात नहीं सुनी। इसके बावजूद, एक बेगुनाह को सड़क पर खींचकर जला दिया गया। फिलहाल इलाके में तनाव व्याप्त है और अभी तक इस जघन्य हत्याकांड में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जो बांग्लादेश में कानून व्यवस्था की स्थिति पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
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