World News: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से लगातार जबरन गुमशुदगी की घटनाएं सामने आ रही हैं। ताजा मामला क्वेटा से सामने आया है, जहां मोहसिन शाहवानी नामक युवक को किल्ली कंबरानी इलाके स्थित उसके घर से देर रात कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने कथित रूप से उठा लिया।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट और द बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, शाहवानी को आधी रात को एक गुप्त ऑपरेशन के तहत हिरासत में लिया गया और उसे अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। मोहसिन के पिता, दीन मोहम्मद शाहवानी, ने इस कार्रवाई को जबरन अपहरण करार दिया है।

यह घटना उस वक्त सामने आई है, जब इमाम बंगुलजई के बेटे शेरबाज बंगुलजई और चार अन्य को भी इसी इलाके से ठीक इसी तरह उठाया गया था। इन सभी की अभी तक कोई सूचना नहीं है।

परिवार को कोई सुराग नहीं

वाशुक जिले में भी इसी तरह की एक घटना ने लोगों को झकझोर दिया है। यहां मीर हाजी हासिल खान सासोली के घर पर 31 जुलाई की रात करीब दो बजे छापा मारा गया, और उनके बेटे अब्दुल करीम को जबरन उठा लिया गया। करीम का भी कोई अता-पता नहीं है। परिवार का आरोप है कि उस रात न सिर्फ करीम को उठाया गया, बल्कि घर की संपत्ति को नुकसान भी पहुंचाया गया।

केच जिले से भी एक मामला सामने आया है, जहां होथाबाद निवासी जाफर पुत्र एजाज को 30 जुलाई को खैराबाद इलाके से कथित तौर पर उठाया गया। जाफर की भी अब तक कोई खबर नहीं है।

इन घटनाओं के बीच, वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स (VBMP) का प्रदर्शन क्वेटा प्रेस क्लब के बाहर 5899वें दिन में प्रवेश कर गया है। VBMP लगातार जबरन गुमशुदगियों के खिलाफ आवाज उठाता रहा है।

VBMP अध्यक्ष नसरुल्लाह बलूच ने हाल ही में विश्वविद्यालय की छात्रा महजबीन बलूच का मामला भी उठाया है, जिसे क्वेटा सिविल अस्पताल से हिरासत में लिए जाने का आरोप है। VBMP के अनुसार, महजबीन को 65 दिन हो चुके हैं और वह अब भी लापता है।

मानवाधिकार संगठनों ने इन घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पाकिस्तान में खासकर बलूचिस्तान जैसे इलाकों में नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की बुरी तरह अनदेखी हो रही है। बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के लोगों को जबरन उठाया जाना एक लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

Share.
Exit mobile version