रांची। धुर्वा से अपहृत बच्चों की सकुशल बरामदगी को लेकर झारखंड पुलिस जहां अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गुरुवार को भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में मरांडी ने कहा कि बच्चे मिलने के बाद पुलिस जश्न मना रही है, जबकि सच यह है कि पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी तरह विफल रहा

मरांडी ने आरोप लगाया कि अपहृत बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) भेजने के बजाय उन्हें गोद में बैठाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई, जो कानून की मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि 2 से 8 जनवरी तक बच्चे धुर्वा और हटिया क्षेत्र में ही थे, लेकिन पुलिस उन्हें खोजने में नाकाम रही। अंततः मीडिया, राजनीतिक दबाव और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रयास से बच्चे सुरक्षित लौटे।

उन्होंने मांग की कि घोषित इनाम की राशि सामाजिक कार्यकर्ता सचिन प्रजाति, डब्लू साहू और सन्नी को दी जाए तथा राज्य सरकार उन्हें सम्मानित करे। मरांडी ने आशंका जताई कि पुलिस अधिकारी अपनी प्रशंसा के लिए इनाम की राशि अपने खाते में डाल सकते हैं। ऐसा होने पर भाजपा विरोध करेगी।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि पुलिस सच में सक्रिय होती तो राज्य में आज भी 413 बच्चे लापता नहीं होते। इसके साथ ही उन्होंने शराब घोटाले में एसीबी की कार्रवाई को “मैच फिक्सिंग” करार देते हुए आरोप लगाया कि जानबूझकर समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती, ताकि आरोपियों को बेल मिल सके।

उन्होंने ईडी और राज्य पुलिस के बीच टकराव का भी जिक्र करते हुए कहा कि जब ईडी भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई कर रही है, तब राज्य पुलिस ईडी अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज करा रही है। मरांडी ने उच्च न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेकर जांच कराने और ऐसे मामलों की सीबीआई जांच कराने की मांग की।

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