रांंची: कांके स्थित बेकन फैक्ट्री केवल एक सरकारी इमारत नहीं, बल्कि झारखंड के गौरवशाली औद्योगिक इतिहास का एक जीवंत प्रतीक है। एक दौर था जब यहां से निकलने वाले मांस उत्पादों की खुशबू पूरे देश और पूर्वोत्तर के बाज़ारों में महकती थी। आज, राज्य सरकार के प्रयासों से इस ‘सोए हुए हाथी’ को फिर से जगाने की तैयारी पूरी हो चुकी है।

गौरवशाली इतिहास : जब ‘रैनबैक’ (Ranback) था ग्लोबल ब्रांड

इस फैक्ट्री की स्थापना एशिया की सबसे बड़ी और आधुनिक मीट प्रोसेसिंग यूनिट के रूप में की गई थी। यहां का अपना ब्रांड था— ‘रैनबैक’

  • उत्पादों की विविधता: यहां उच्च गुणवत्ता वाले पोर्क, कबाब, सलामी, सॉसेज और हैम तैयार किए जाते थे।

  • बाज़ार में दबदबा: रैनबैक के उत्पाद न केवल झारखंड और बिहार, बल्कि नागालैंड, मिजोरम और असम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों के पसंदीदा थे। यहां तक कि सेना और बड़े होटलों में भी यहां से सप्लाई होती थी।

बदहाली से बहाली तक का सफर

समय के साथ तकनीक पुरानी होने और रख-रखाव की कमी के कारण यह फैक्ट्री बंद हो गई थी। लेकिन अब, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के नेतृत्व में इसके जीर्णोद्धार का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है: 

  • आधुनिक मशीनरी: पुरानी मशीनों की जगह अब अत्याधुनिक ऑटोमैटिक प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाई जाएंगी, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों (HACCP) को पूरा करेंगी।

  • कोल्ड चेन नेटवर्क: उत्पादों को ताज़ा रखने के लिए हाई-टेक कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेटेड वैन का जाल बिछाया जाएगा।

  • बायो-सिक्योरिटी: पशुओं की स्वास्थ्य जांच से लेकर पैकेजिंग तक, पूरी प्रक्रिया को बायो-सिक्योर और स्वच्छ बनाया जाएगा।

स्थानीय किसानों और पशुपालकों के लिए वरदान

इस फैक्ट्री के खुलने से सबसे बड़ा लाभ झारखंड के हजारों पशुपालकों को होगा:

  • निश्चित बाज़ार: सुअर पालन (Piggery) से जुड़े किसानों को अब अपने उत्पाद बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना होगा।

  • आय में वृद्धि: फैक्ट्री सीधे किसानों से पशु खरीदेगी, जिससे उन्हें उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिलेगा।

  • नस्ल सुधार: फैक्ट्री के साथ मिलकर सरकार किसानों को बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध कराएगी ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर का उत्पादन हो सके।

‘ग्रीन इकोनॉमी’ और भविष्य का लक्ष्य

सरकार का विजन केवल फैक्ट्री चलाना नहीं, बल्कि एक पूरा इकोसिस्टम तैयार करना है। इसमें वेस्ट मैनेजमेंट के जरिए खाद बनाना और पैकेजिंग में ईको-फ्रेंडली सामग्री का उपयोग करना शामिल है। लक्ष्य यह है कि वर्ष 2027 तक ‘रैनबैक’ ब्रांड को एक बार फिर भारत के हर बड़े स्टोर के शेल्फ पर पहुंचाया जाए।

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