Patna: बिहार के चर्चित शिक्षक फैसल खान उर्फ खान सर और उनके दोनों बॉडीगार्ड्स से जुड़ी एक बड़ी कानूनी खबर पटना सिविल कोर्ट से सामने आ रही है। राजधानी पटना के बहुचर्चित कोचिंग संस्थान विवाद और उसके बाद हुई गोलीबारी के मामले में आरोपित खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर बुधवार को जिला जज की अदालत में लंबी बहस के बाद सुनवाई पूरी हो गई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्य देखने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब आगामी 10 जुलाई को अदालत अपना अंतिम आदेश सुनाएगी।
Read more: खान सर फायरिंग मामला: गार्डों के हथियारों के लाइसेंस होंगे रद्द
पुराना रिकॉर्ड तलब
जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच तीखी कानूनी बहस हुई। इससे पहले मंगलवार को भी इस मामले पर करीब 40 मिनट तक गहन सुनवाई हुई थी, जिसमें घटना से जुड़े विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई थी। शिकायतकर्ता रौशन आनंद के अधिवक्ताओं द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों के बाद, अदालत ने खान सर के पुराने आपराधिक मामलों का पूरा रिकॉर्ड पुलिस प्रशासन से तलब किया था। कोर्ट के सख्त निर्देशानुसार, बुधवार को सुनवाई के दौरान संबंधित पुराना रिकॉर्ड हर हाल में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
वकील की मुख्य दलीलें
खान सर के वरिष्ठ अधिवक्ता मुरारी तिवारी ने सुनवाई संपन्न होने के बाद मीडिया को बताया कि खान सर के साथ-साथ उनके दोनों निजी सुरक्षा कर्मियों की अग्रिम जमानत याचिका पर भी बहस पूरी हो चुकी है। बचाव पक्ष ने कोर्ट में पुरजोर दलील दी कि दोनों सुरक्षा कर्मी एक रजिस्टर्ड निजी सुरक्षा एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए गए थे और उनका दायित्व केवल सुरक्षा संभालना था, न कि किसी विवाद को बढ़ावा देना। वकील ने तर्क दिया कि गोलीबारी की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में खान सर की कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका नहीं है और उन्होंने जांच एजेंसियों के साथ हर मोड़ पर पूरा सहयोग किया है।
Read more: खान सर की गिरफ्तारी पर 30 जून तक रोक, अग्रिम जमानत पर सुनवाई अब इसी दिन
अधिवक्ता ने कोर्ट को स्पष्ट किया कि वर्तमान में खान सर के विरुद्ध कोई भी आपराधिक मामला लंबित नहीं है और पूर्व में दर्ज हुए पुराने मामलों में भी उन्हें न्यायालय से राहत मिल चुकी है। गौरतलब है कि पटना के कोचिंग विवाद के बाद हुई फायरिंग की घटना में खान सर और उनके दोनों बॉडीगार्ड्स को नामजद आरोपी बनाया गया था, जिसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम बेल का रुख किया है। अब पूरे बिहार की निगाहें 10 जुलाई को आने वाले कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं।




