Ayodhya: अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी और चंदा अनियमितता मामले में जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मीडिया रिपोर्टों से प्राप्त ताजा जानकारी के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल मामले की गहराई से पड़ताल कर रही जांच एजेंसियां अब गिरफ्तार किए गए पांच मुख्य आरोपियों का नार्को-एनालिसिस और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के कानूनी व वैज्ञानिक विकल्पों पर गंभीरता से मंथन कर रही हैं। अयोध्या पुलिस इस मामले में अब तक पांच लोगों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है, वहीं दूसरी ओर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी चंपत राय के इस्तीफे के बाद से इस पूरे घटनाक्रम को लेकर देश भर में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं।
वैज्ञानिक जांच
जांच एजेंसियों के आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि अब तक की पारंपरिक पुलिस पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण कड़ियां और जानकारियां सामने आई हैं। हालांकि, यदि सामान्य पूछताछ से पूरे वित्तीय हेरफेर और षड्यंत्र का पूरी तरह खुलासा नहीं होता है, तो आधुनिक वैज्ञानिक जांच तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। पुलिस का मुख्य फोकस इस बात का पता लगाने पर है कि इस कथित वित्तीय अनियमितता का खाका कैसे तैयार किया गया, चढ़ावे के धन का लेन-देन किन गुप्त माध्यमों और बैंक खातों से हुआ और क्या इस पूरे मामले के पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
कानूनी प्रक्रिया
देश के वरिष्ठ विधान और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पुलिस प्रशासन अपनी मर्जी से किसी भी आरोपी का नार्को-एनालिसिस या पॉलीग्राफ टेस्ट स्वतः नहीं करा सकता है। इसके लिए देश की सर्वोच्च अदालत के दिशा-निर्देशों के तहत संबंधित कोर्ट की औपचारिक अनुमति और स्वयं आरोपियों की लिखित सहमति होना अनिवार्य है। कानूनन इन टेस्ट्स से मिली जानकारियों को अदालत में सीधे प्रत्यक्ष साक्ष्य (Direct Evidence) नहीं माना जाता, बल्कि इनके आधार पर मिलने वाले सुरागों से पुलिस ठोस और स्वतंत्र सबूत जुटाती है। फिलहाल यह विकल्प विचाराधीन है और इस पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।




