Ramgarh : मरकजी अंजुमन इत्तेहादुल अंसार के तत्वावधान में आयोजित प्रथम इजलास में झारखंड के शिक्षा सचिव उमा शंकर सिंह द्वारा मदरसा आलिम-फाजिल डिग्री को असंवैधानिक कहे जाने के बयान की तीखी निंदा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित कर इसे मुस्लिम विरोधी रवैया बताया गया।
अंजुमन के अध्यक्ष सरफुद्दीन अंसारी, सचिव कुर्बान अंसारी और खजांची अयूब अंसारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा वर्ष 2003 से नियमित रूप से आलिम और फाजिल की परीक्षाएं आयोजित की जाती रही हैं, जो क्रमशः बीए और एमए के समकक्ष मानी जाती हैं।
मुख्य वक्ता और आमया संगठन के अध्यक्ष एस. अली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 5 नवंबर 2024 को उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड की आलिम-फाजिल डिग्री को असंवैधानिक ठहराया था, लेकिन यह आदेश केवल उत्तर प्रदेश राज्य के लिए लागू है। इसके बावजूद झारखंड शिक्षा सचिव ने बिना कानूनी आधार के इस निर्णय को झारखंड में भी लागू करने की कोशिश की, जो हजारों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश prospective effect में लागू होता है, यानी फैसले की तारीख के बाद से, न कि retrospective effect में। फिर भी झारखंड शिक्षा विभाग ने पूर्व में जारी डिग्रियों को अमान्य ठहराने की पहल की है, जिससे अनेक अभ्यर्थियों का भविष्य संकट में है।
बैठक में पारित प्रस्ताव में तीन मांगें रखी गईं
- वर्ष 2003 से 2023 तक जैक द्वारा दी गई आलिम-फाजिल डिग्रियों की वैधानिकता बरकरार रखी जाए।
- भाषा पद के अभ्यर्थियों का लंबित परिणाम जारी किया जाए।
- रांची विश्वविद्यालय से आलिम-फाजिल की परीक्षा तत्काल आयोजित की जाए।
बैठक में डॉ. इलियास, लाइक अहमद, अब्दुल अंसार, जियाउद्दीन अंसारी, सजीर अंसारी सहित कई लोग उपस्थित थे।



