वाशिंगटन, (अमेरिका) | एजेंसी

आधुनिक दौर की जंग अब केवल शारीरिक ताकत या बड़े बमों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह ‘इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर’ के युग में प्रवेश कर चुकी है। इस नई रणनीति का मूल मंत्र है—दुश्मन पर हमला करने से पहले उसे ‘अंधा और बहरा’ बना देना। इसी दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए अमेरिका ने एक ऐसा घातक हथियार तैयार किया है, जो बिना एक भी गोली चलाए दुश्मन के पूरे सुरक्षा तंत्र को ध्वस्त कर सकता है। इस एडवांस इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट का नाम है ‘EA-37B कंपास कॉल’

यह विमान दरअसल एक उड़ता हुआ जैमिंग स्टेशन है। इसमें लगे हाई-पावर इलेक्ट्रॉनिक जैमर्स रेडियो फ्रीक्वेंसी पर सीधा हमला करते हैं। जब यह एयरक्राफ्ट सक्रिय होता है, तो यह न केवल दुश्मन के सिग्नल को बाधित करता है, बल्कि ‘फेक सिग्नल’ भी जनरेट करता है। इसका नतीजा यह होता है कि दुश्मन का रडार गलत जानकारी दिखाने लगता है, असली और नकली टारगेट की पहचान असंभव हो जाती है और गाइडेड मिसाइलें अपना रास्ता भटक जाती हैं। सीधे शब्दों में कहें तो दुश्मन के पास हथियार तो होंगे, लेकिन वे उन्हें इस्तेमाल करने की क्षमता खो देंगे।

अमेरिका की यह रणनीति ईरान जैसे देशों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है, जिन्होंने हाल के वर्षों में अपनी ड्रोन और मिसाइल शक्ति को काफी बढ़ाया है। सीधे टकराने के बजाय अमेरिका पहले दुश्मन के ‘नर्वस सिस्टम’ यानी कम्युनिकेशन को कमजोर करने पर ध्यान दे रहा है। यदि रडार ही काम नहीं करेगा, तो मिसाइल डिफेंस सिस्टम किसे रोकेगा? यही कारण है कि आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर को दिमाग और तकनीक की असली लड़ाई माना जा रहा है।

भारत के नजरिए से देखें तो यह तकनीक भविष्य की रक्षा जरूरतों के लिए एक बड़ा सबक है। हालांकि भारत अपनी ‘अग्नि’ मिसाइल सीरीज और स्ट्राइक क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है, लेकिन भविष्य के युद्धों में केवल मिसाइलें पर्याप्त नहीं होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और साइबर अटैक जैसी तकनीकों में निवेश बढ़ाना होगा। यदि भारत अपनी सबमरीन आधारित मिसाइलों के साथ ऐसी जैमिंग तकनीक जोड़ देता है, तो यह एक ऐसी ‘साइलेंट स्ट्राइक’ होगी जिसका पता दुश्मन को हमला होने तक नहीं चल पाएगा। ईए-37बी जैसी तकनीक ने यह साबित कर दिया है कि भविष्य का विजेता वही होगा जिसका इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सबसे मजबूत होगा।

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