World News: अमेरिकी अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति पर बड़ा झटका देते हुए कहा है कि राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है। अदालत ने अपने फैसले में साफ किया कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) की सीमाओं का उल्लंघन किया है। यह फैसला उनके कार्यकाल के दौरान लगाए गए उन टैरिफ पर लागू होगा, जिन्हें उन्होंने आपातकालीन शक्तियों के तहत लागू किया था।

ट्रंप प्रशासन ने फरवरी और अप्रैल में चीन, कनाडा और मैक्सिको समेत कई देशों पर टैरिफ लगाए थे। अदालत ने 7-4 के फैसले में कहा कि IEEPA, जो 1977 से लागू है, मुख्य रूप से प्रतिबंध और संपत्ति जब्ती के लिए इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन इसमें टैरिफ लगाने जैसी कोई शक्ति राष्ट्रपति को नहीं दी गई है। अदालत ने माना कि राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में राष्ट्रपति कई कदम उठा सकते हैं, मगर टैक्स या टैरिफ लगाना इसमें शामिल नहीं है।

हालांकि, अदालत के इस फैसले का असर उन टैरिफ पर नहीं पड़ेगा जो स्टील और एल्युमीनियम पर अलग कानूनों के तहत लगाए गए थे। अदालत ने अपने फैसले को 14 अक्टूबर तक के लिए स्थगित रखा है ताकि ट्रंप प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय मिल सके।

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रपति के टैरिफ फिलहाल लागू रहेंगे और हमें भरोसा है कि अंततः हम सुप्रीम कोर्ट में जीत दर्ज करेंगे। ट्रंप प्रशासन ने दलील दी थी कि IEEPA के तहत आयात को नियंत्रित करने का अधिकार राष्ट्रपति को है और इसमें टैरिफ लगाने का अधिकार भी शामिल है। लेकिन अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि कानून में टैरिफ का जिक्र तक नहीं है।

फैसला आने के तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे अमेरिका के लिए एक आपदा करार दिया और लिखा कि अगर ये टैरिफ खत्म हो गए तो यह देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर देंगे। ट्रंप ने अपील अदालतों को पक्षपाती बताते हुए भरोसा जताया कि सुप्रीम कोर्ट उनके पक्ष में फैसला देगा।

अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को ट्रंप की व्यापारिक नीतियों पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखता है तो यह अमेरिका की व्यापार नीतियों में बड़ा बदलाव होगा और भविष्य में राष्ट्रपति की शक्तियों पर भी अंकुश लगेगा।

ट्रंप पहले से ही चुनावी तैयारियों में जुटे हुए हैं और इस फैसले ने उनके सामने नई कानूनी चुनौती खड़ी कर दी है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर होगी कि वहां यह मामला किस दिशा में जाता है।

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