World News: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग ने अमेरिका को सक्रिय कर दिया है। ऑपरेशन राइजिंग लायन के तहत इजराइल ने ईरान पर हमला किया था। एक ओर जहां इजराइल के फाइटर प्लेन ईरान के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान की घातक हाइपरसोनिक मिसाइलों से इजराइल की धरती कहर कांप रही है। इस हालात में अमेरिका ने भी इतिहास में शायद पहली बार तीन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट की ओर भेजने का फैसला किया है।

तीन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट भेजने का किया फैसला

फिलहाल यूएसएस कार्ल विनसन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पहले से ही मिडिल ईस्ट में तैनात है, जिसमें क्रूजर यूएसएस प्रिंसटन, डिस्ट्रॉयर यूएसएस स्टेरेट और यूएसएस विलियम पी लॉरेंस शामिल हैं। इस ग्रुप पर करीब 90 एयरक्राफ्ट तैनात हैं, जिनमें एफ-18ई/एफ, एफ-35सी, ईए-18जी, ई-2डी, एचएच-60आर/एस जैसे आधुनिक लड़ाकू और सपोर्ट विमान शामिल हैं।

इसके अलावा यूएसएस निमित्ज कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, जो पहले साउथ चाइना सी में तैनात था, उसे समय से पहले मिडिल ईस्ट की ओर रवाना कर दिया है। इसमें कैरियर एयर विंग 17 के अंतर्गत 90 से ज्यादा विमान हैं। इसमें चार स्क्वाड्रन एफ-18 सुपर हॉर्नेट, ईए-18जी ग्रोवलर, ई-2सी/डी हॉकआई और एमएच-60आर हेलिकॉप्टर शामिल हैं। यह स्ट्राइक ग्रुप 15 दिनों के भीतर मिडिल ईस्ट पहुंच जाएगा। तीसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड है, जिसे मेडिटेरियन सी की ओर मूव किया जा रहा है। इसमें एफ-18 सुपर हॉर्नेट के चार स्क्वाड्रन, ईए-18जी, ई-2सी/डी, एचएच-60आर हेलिकॉप्टर और एक क्रूजर के अलावा छह गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं। इस ग्रुप में अटैक सबमरीन भी तैनात हैं, जो इसकी मारक क्षमता को और खतरनाक बनाती है।

इससे पहले अमेरिका ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात किए थे। अब तीसरे ग्रुप की तैनाती इस बात का संकेत है कि अमेरिका इस जंग में पूरी तैयारी के साथ उतरने को तैयार है। इस कदम से मिडिल ईस्ट में युद्ध का दायरा और बढ़ने की आशंका है।

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