Lohardaga news: बदलते दौर में जहां रिश्तों की गर्माहट धीरे-धीरे कम होती जा रही है, वहीं शुक्रवार को लोहरदगा रेलवे साइडिंग परिसर में चार दशक पुराने दोस्ती के रिश्ते का एक ऐसा खूबसूरत दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। लोहरदगा के सबसे पुराने बस एजेंट इब्राहिम अशरफी (कल्लू) और रांची के चुटिया निवासी जोगेन्द्र सिंह लगभग 40 वर्षों बाद एक-दूसरे से मिले। दोनों दोस्तों की मुलाकात का अंदाज इतना आत्मीय और भावनात्मक था कि देखने वालों की नजरें उन पर टिक गईं।
जैसे ही दोनों आमने-सामने आए, उन्होंने मुस्कुराते हुए एक-दूसरे का गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। कुछ पल तक दोनों एक-दूसरे को निहारते रहे, मानो वर्षों की यादें उनकी आंखों के सामने तैर रही हों। इसके बाद दोनों गले मिले और भावनाओं से भर उठे। करीब चार दशक के लंबे अंतराल के बाद हुई इस मुलाकात में दोनों मित्रों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी।
उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए लंबे समय तक बातचीत की। बचपन और युवावस्था के दिनों की अनेक यादों को साझा किया तथा उन दोस्तों और परिचितों को भी याद किया, जिनके साथ उन्होंने जीवन के सुनहरे पल बिताए थे। मुलाकात के दौरान दोनों मित्र एक साथ बैठकर चाय की चुस्कियां लेते रहे। बातचीत के दौरान कई बार ऐसा लगा जैसे समय ठहर गया हो और दोनों फिर से अपने पुराने दिनों में लौट गए हों। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि दोनों एक-दूसरे को इस तरह देख रहे थे, मानो उन्हें दुनिया का सबसे अनमोल खजाना मिल गया हो।
इस भावुक मिलन ने यह साबित कर दिया कि सच्ची दोस्ती समय और दूरी की मोहताज नहीं होती। वर्षों का अंतराल भी उन रिश्तों को कमजोर नहीं कर सकता, जिनकी नींव विश्वास, अपनापन और आत्मीयता पर टिकी हो। रेलवे साइडिंग लोहरदगा में हुई यह अनोखी मुलाकात पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रही।
लोगों ने इसे दोस्ती की मिसाल बताते हुए कहा कि आज के दौर में ऐसे रिश्ते बहुत कम देखने को मिलते हैं। यह दृश्य हर किसी को यही संदेश दे गया कि जीवन में यदि एक सच्चा मित्र मिल जाए, तो वह किसी अनमोल दौलत से कम नहीं होता। वास्तव में, काश! हर किसी को जीवन में ऐसा एक सच्चा दोस्त जरूर मिले।



