रांची/हजारीबाग: कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने हजारीबाग जिले के बड़कागांव और केरेडारी क्षेत्र में हालिया कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर अपनी ही सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को जारी एक तीखी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे राज्य के लिए ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया।

अपराधियों को छूट और जनता पर लाठियां

अंबा प्रसाद ने बड़कागांव के डेली मार्केट में दिनदहाड़े हुई गोलीबारी की घटना का जिक्र करते हुए पुलिस को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधी सरेआम गोलियां चलाकर 30 से 40 लाख रुपये के जेवरात लूटकर फरार हो गए, लेकिन सूचना मिलने के बाद भी पुलिस ने उन्हें पकड़ने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। अंबा ने हैरानी जताते हुए कहा कि जहाँ एक ओर अपराधी बेखौफ हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस आम जनता और महिलाओं पर बल प्रयोग कर रही है।

रैयतों और महिलाओं के साथ बर्बरता का आरोप

केरेडारी (चट्टी बरियातू) की घटना का उल्लेख करते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि अपनी जमीन के उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग कर रही महिला रैयतों को पुलिस द्वारा पीटा जाना अत्यंत दुखद है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन का पूरा ध्यान केवल खनन कंपनियों को सुरक्षा प्रदान करने पर है। उन्होंने कहा, “प्रशासन कंपनियों की पहरेदारी में इतना मशगूल है कि उसे जनता के जान-माल और जमीन की लूट दिखाई नहीं दे रही।”

शिबू सोरेन के आदर्शों की दुहाई

अपने बयान में अंबा प्रसाद ने झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन (गुरुजी) का जिक्र करते हुए भावनात्मक कार्ड खेला। उन्होंने सवाल किया कि क्या जल-जंगल-जमीन की लड़ाई लड़ने वाले दिशोम गुरु ने इसी झारखंड का सपना देखा था? उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कुछ लोग गुरुजी के आदर्शों की आड़ में झारखंड का ‘व्यापार’ कर रहे हैं।

अंबा प्रसाद के इस बयान ने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्तमान सरकार आदिवासी, पिछड़ों और मूलवासियों की रक्षा करने में विफल साबित हो रही है और हक की आवाज उठाने वालों पर जुल्म ढाया जा रहा है।

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