Ranchi: आदिवासी समाज की पहचान और उनके अस्तित्व से जुड़े ‘आदिवासी धर्म कोड’ की मांग एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर जोर पकड़ने वाली है। आगामी 25 फरवरी को देश की राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर एक विशाल राष्ट्रीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम का नेतृत्व राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति, भारत द्वारा किया जा रहा है।

13 राज्यों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

समिति के राष्ट्रीय संयोजक देव कुमार धान ने शुक्रवार को रांची में आयोजित एक प्रेस वार्ता में बताया कि इस विरोध प्रदर्शन में झारखंड सहित गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के हजारों आदिवासी अगुवा और प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। यह प्रदर्शन केंद्र सरकार पर अलग जनगणना कोड (Sarna/Adivasi Religion Code) को लागू करने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा ज्ञापन

देव कुमार धान ने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर धरना देने के बाद समिति का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया से मुलाकात करेगा। उन्हें एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा जाएगा, जिसमें आदिवासियों की धार्मिक पहचान को आधिकारिक मान्यता देने की मांग की जाएगी।

आदिवासी पहचान का सवाल

बता दें कि आदिवासी समाज लंबे समय से प्रकृति आधारित अपनी पूजा पद्धति के लिए अलग धर्म कोड की मांग कर रहा है। झारखंड विधानसभा से इस संबंध में प्रस्ताव पारित होने के बाद अब गेंद केंद्र के पाले में है। 25 फरवरी का यह प्रदर्शन इस आंदोलन को राष्ट्रीय दिशा देने और केंद्र सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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