Ranchi News: झारखंड की राजनीति में इन दिनों एक नया नाम ‘जी राम जी’ चर्चा के केंद्र में है। यह नाम किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की उस महात्वाकांक्षी योजना का है जिसे कांग्रेस ‘विवाद’ और भाजपा ‘विकास’ का पर्याय बता रही है।

झारखंड की सियासत में ‘जी राम जी’ की एंट्री, भ्रष्टाचार और ‘राम’ नाम पर आर-पार

भाजपा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद आदित्य साहू ने आज रांची में एक प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस पर जो तीखे वाण छोड़े, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा गांव की चौपालों तक गरमाने वाला है।

मनरेगा: सुधार का मॉडल या भ्रष्टाचार की भेंट?

आदित्य साहू ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि मनरेगा अब भ्रष्टाचार और लूट का अड्डा बन चुका है। उन्होंने झारखंड का ही उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि कैसे खूंटी जिले में 24 करोड़ रुपये के गबन के मामले में एक सीनियर आईएएस अधिकारी को जेल की हवा खानी पड़ी। साहू के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 194 करोड़ का गबन दर्ज किया गया, और हालत यह है कि कागजों पर सड़कें बन गईं लेकिन जमीन पर उनका वजूद ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मशीनों से काम कराकर मजदूरों का हक मारा जा रहा था और डिजिटल उपस्थिति के बावजूद पैसों की हेराफेरी जारी रही।

क्या है ‘जी राम जी’ योजना?

साहू ने बड़े गर्व से ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘जी राम जी’ योजना की खूबियां गिनाईं। उन्होंने इसे 20 साल पुराने मनरेगा का ‘अपग्रेडेड और हाई-टेक’ वर्जन बताया। इस योजना के चार मुख्य पिलर हैं:

  1. जल संरक्षण: गिरते जलस्तर को बचाने के लिए निर्माण कार्य।

  2. बुनियादी ढांचा: गांव को बाजार से जोड़ने वाली सड़कों का जाल।

  3. रोजगार सृजन: अनाज भंडारण जैसे ढांचों का निर्माण।

  4. पर्यावरण सुरक्षा: मिट्टी कटाव और बाढ़ बचाव के कार्य।

कांग्रेस को ‘राम’ से नफरत क्यों?

साहू ने सीधा प्रहार करते हुए कहा, “कांग्रेस को परेशानी इस बात से है कि मजदूरों को अब 100 की जगह 125 दिन का काम मिलेगा। उन्हें दिक्कत है कि काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। लेकिन सबसे ज्यादा तकलीफ उन्हें योजना के नाम में लगे ‘राम’ शब्द से है।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति करने वाली कांग्रेस को शुरू से ही प्रभु श्री राम से नफरत रही है।

एआई (AI) रखेगा भ्रष्टाचार पर नजर

भाजपा नेता ने बताया कि इस योजना में अब इंसानी हेराफेरी की गुंजाइश खत्म होगी। इसमें एआई-आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणाली, जीपीएस मोबाइल ट्रैकिंग और साल में दो बार पंचायतों में ‘सोशल ऑडिट’ का सख्त प्रावधान है। साथ ही, किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए साल में 60 दिन की ‘नो वर्क’ अवधि रखी गई है, ताकि फसल कटाई के समय किसानों को मजदूर मिल सकें और मजदूरों को खेतों में अच्छी दिहाड़ी।

8 जनवरी से ‘रणभेरी’

भाजपा ने तय किया है कि वह कांग्रेस के ‘दुष्प्रचार’ को चुपचाप नहीं सहेगी। आगामी 8 से 10 जनवरी तक झारखंड के सभी मंडलों में भाजपा कार्यकर्ता सभाएं और गोष्ठियां करेंगे। इस अभियान का मकसद गांव के गरीब और किसान को ‘जी राम जी’ योजना की हकीकत बताना और कांग्रेस के ‘झूठ’ का पर्दाफाश करना है। प्रेस वार्ता में मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक और प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने भी सुर में सुर मिलाते हुए इसे ग्रामीण भारत के लिए गेम-चेंजर बताया।

इस खबर को भी पढ़ें : मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन, डीसी कार्यालय घेरा

Share.
Exit mobile version