रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन मंगलवार को राज्य का वित्तीय भविष्य सदन के पटल पर रखा गया। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,58,560 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पेश किया। पिछले वर्ष (1,45,400 करोड़) के मुकाबले यह बजट करीब 9 प्रतिशत अधिक है। ‘अबुआ दिशोम’ नाम दिए गए इस बजट में सरकार ने सामाजिक सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और शिक्षा को अपनी प्राथमिकता की धुरी बनाया है।

भावुक क्षण और गुरुजी को समर्पण

बजट भाषण की शुरुआत में वित्त मंत्री थोड़े भावुक नजर आए। उन्होंने इस बजट को अपने ‘गुरुजी’ को समर्पित करते हुए कहा, “आज दिशोम गुरु की कमी खल रही है। किसी के पैरों पर गिरकर कुछ पाने से बेहतर है, अपने पैरों पर चलकर कामयाबी हासिल करना।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बजट राज्य के अंतिम व्यक्ति के आंसू पोंछने और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने की एक ईमानदार कोशिश है।

स्वास्थ्य और शिक्षा में क्रांतिकारी कदम

बजट की सबसे बड़ी घोषणा स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर रही। सरकार ने राज्य में मेडिकल शिक्षा को नई ऊंचाई पर ले जाने का खाका खींचा है:

  • PPP मोड पर मेडिकल कॉलेज: प्रथम चरण में धनबाद, गिरिडीह, जामताड़ा और खूंटी के सदर अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। दूसरे चरण में साहिबगंज और सरायकेला का चयन किया गया है।

  • MBBS सीटें: सरकार ने आगामी चार वर्षों में राज्य में एमबीबीएस की सीटों को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।

  • नई यूनिवर्सिटी: शिक्षा के विस्तार के लिए चतरा में ‘डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय’ की स्थापना की जाएगी।

केंद्र से बकाया और आत्मनिर्भरता का संकल्प

वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कर हिस्सेदारी और अनुदान के मद में राज्य को मिलने वाले लगभग 16 हजार करोड़ रुपये अब तक नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि ‘जी रामजी योजना’ से राज्य पर सालाना 5 हजार करोड़ का अतिरिक्त बोझ भी बढ़ेगा, लेकिन झारखंड अपने सीमित संसाधनों और मजबूत ग्राम सभाओं के बल पर विकास की गति को थमने नहीं देगा।

सामाजिक सुरक्षा और जेंडर फोकस

बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री की पत्नी ने उन्हें दही-चीनी खिलाकर सदन के लिए विदा किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह बजट महिलाओं के हितों को सर्वोपरि रखेगा। वित्त मंत्री ने भी अपने भाषण में गरीबी उन्मूलन और कमजोर वर्गों को प्राथमिकता देने की बात कही। बजट का बड़ा हिस्सा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और ग्रामीण विकास पर केंद्रित है, जिससे समावेशी विकास को गति मिलेगी। कुल मिलाकर, राधाकृष्ण किशोर का यह दूसरा बजट झारखंड को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्वास्थ्य ढांचे को ग्रामीण इलाकों तक मजबूती से पहुंचाने की एक महत्वाकांक्षी योजना दिखाई देती है।

Share.
Exit mobile version