रांची: दीपावली पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस साल धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसे धन त्रयोदशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, कुबेर और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी।
धनतेरस पर खरीदारी का महत्व
धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुएं खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदारी करने से 13 गुना अधिक फल मिलता है और घर में धन-समृद्धि बनी रहती है।
खरीदारी के शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर खरीदारी के लिए शुभ समय इस प्रकार हैं:
- सुबह 8:16 बजे से 9:48 बजे तक।
- सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:56 बजे तक।
- शाम 6:19 बजे से रात 8:17 बजे तक।
प्रदोष काल: शाम 5:49 बजे से रात 8:23 बजे तक।
वृषभ लग्न: शाम 6:19 बजे से रात 8:17 बजे तक।
धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है।
- पूजा का शुभ समय: शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक।
- प्रदोष काल: शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक।
यम दीपदान का महत्व
धनतेरस की शाम यमराज के नाम से दीपदान करने की परंपरा है। इसके लिए घर के मुख्य दरवाजे के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तेल का दीपक जलाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे परिवार को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।
क्या है धनतेरस की पौराणिक मान्यता?
पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस दिन को धनतेरस कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और शुभ खरीदारी करने से पूरे साल घर में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है।






