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लौह पुरुष को देश का नमन, राष्ट्रपति से गृह मंत्री तक ने अर्पित की पुष्पांजलि

देशभर में 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई दिग्गजों ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती और 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के अवसर पर पुष्पांजलि एवं श्रद्धांजलि।

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New Delhi: इतिहास के पन्नों में जब भी मजबूत इच्छाशक्ति और अटूट नेतृत्व की मिसाल दी जाती है, तो सबसे पहला नाम ‘लौह पुरुष’ सरदार वल्लभभाई पटेल का आता है। सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। शनिवार सुबह सभी नेता नई दिल्ली के सरदार पटेल चौक पर पहुंचे, जहां उन्होंने पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए।

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के सरदार पटेल चौक के साथ-साथ राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में भी सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी 151वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रीय एकता दिवस के शुभकामना संदेश में उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी सेनानी और आधुनिक भारत के प्रमुख शिल्पकार के रूप में उनका योगदान अविस्मरणीय है। देश की एकता और अखंडता में उनके अतुलनीय योगदान के सम्मान में उनकी जयंती को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

इसी तरह, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी सरदार पटेल चौक पर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। उन्होंने अपने ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए कहा कि सरदार पटेल का असाधारण जीवन और उनकी विरासत राष्ट्रीय एकता, अटूट संकल्प और निस्वार्थ सेवा का एक स्थायी प्रमाण है, जो आज भी भारत की प्रगति की यात्रा का मार्गदर्शन कर रही है।

गृह मंत्री और अन्य नेताओं की श्रद्धांजलि

गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी पटेल चौक पर वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा कि सरदार साहब ने अपने अदम्य साहस और दूरदर्शिता से रियासतों में बंटे देश को एक सूत्र में पिरोकर मजबूत भारत की नींव रखी। खेड़ा और बारडोली सत्याग्रह के माध्यम से किसानों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष जनसेवा का अनुपम उदाहरण है।

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