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17 राज्यों में वोटर लिस्ट रिवीजन शुरू: नाम कटने पर ERO करेंगे जांच!

निर्वाचन आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का काम शुरू किया। 2% से ज्यादा नाम कटने पर ईआरओ स्तर पर जांच होगी।

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New Delhi: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक और प्रशासनिक हलचलों के बीच निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश के 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। इस अभियान के तहत मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, गलतियों में संशोधन करने और अयोग्य या मृत मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा है। आयोग ने इस बार नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विशेष निगरानी तंत्र लागू किया है।

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2 फीसदी से अधिक नाम हटने पर ERO करेंगे जांच

निर्वाचन आयोग द्वारा तय की गई नई व्यवस्था के अनुसार, यदि किसी मतदान केंद्र (Polling Station) की मतदाता सूची से कुल मतदाताओं में से 2 प्रतिशत से अधिक नाम हटाए जाते हैं, तो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) स्वयं मौके पर इसकी जांच करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य नाम विलोपन (Deletion) की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना है, ताकि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम गलत तरीके से न कटे। इसके अलावा, नाम जोड़ने और हटाने के सभी आवेदनों व उन पर लिए गए एक्शन का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा, जिसकी जानकारी राजनीतिक दलों के साथ भी साझा की जाएगी।

मौजूदा मतदाताओं को फॉर्म भरना अनिवार्य नहीं

पुनरीक्षण अभियान को लेकर मतदाताओं के मन में उठ रही आशंकाओं को दूर करते हुए आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन नागरिकों के नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज हैं, उन्हें सामान्य परिस्थितियों में दोबारा फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, मतदाताओं को जारी होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम अवश्य जांच लेना चाहिए। यदि ड्राफ्ट सूची से नाम गायब मिले या विवरण में कोई त्रुटि हो, तो वे निर्धारित समयसीमा के भीतर संबंधित फॉर्म भरकर अपना दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

नोटिस और पारदर्शी सुनवाई की व्यवस्था

आयोग ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले निर्धारित नियमों के अनुसार नोटिस जारी कर सुनवाई का अवसर दिया जाए। शिकायतों के निपटारे और निगरानी की इस पूरी व्यवस्था से राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं को लगातार अवगत कराया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया विवादमुक्त और निष्पक्ष रहे।

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