Patna: बिहार में पशु चिकित्सा और पशुपालन की कमान अब ग्रामीण महिलाओं यानी ‘सुधा सखियों’ को सौंपने की तैयारी पूरी कर ली गई है। दूध उत्पादन के क्षेत्र से सीधे तौर पर महिलाओं को जोड़ते हुए महिला सशक्तीकरण को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) ने ‘सुधा सखी’ की इस अनूठी पहल की शुरुआत की है। इस नवरात्रि के पावन अवसर पर दुर्गा के नौ रूपों के अंतर्गत सुधा सखी भी नारी शक्ति के एक सशक्त रूप में उभरकर सामने आ रही हैं।
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सुधा सखियों का दायरा और प्रशिक्षण प्रक्रिया
राज्य सरकार की ‘सात निश्चय-3’ के अंतर्गत शामिल ‘सहकार से समृद्धि’ योजना के तहत गांवों में डेयरी उत्पादक सहकारी समितियों का गठन किया जा रहा है। इसके तहत राज्य की 8,053 पंचायतों में सुधा सखियों को पशुपालकों के लिए प्रथम संपर्क कड़ी के रूप में तैनात करने की योजना है।
प्रथम चरण का प्रशिक्षण: इस योजना के पहले चरण के तहत 38 जिलों से चयनित महिलाओं के लिए छह दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन पटना स्थित कॉम्फेड के सभागार में किया गया था।
दी जाने वाली सेवाएं: इस दौरान सुधा सखियों को पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा, संतुलित पशु आहार, कृत्रिम गर्भाधान और वैज्ञानिक पशुपालन से जुड़ी आवश्यक सेवाओं का गहन प्रशिक्षण दिया गया।
पशुपालकों और चिकित्सकों के बीच कड़ी: प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये सखियां अपने-अपने गांवों में पशुपालकों और पशु चिकित्सकों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करेंगी, जिससे प्राथमिक पशु स्वास्थ्य सेवाएं सीधे गांवों तक सुगम हो सकेंगी।
रोजगार के अवसर और सरकारी स्तर पर विशेष पहल
इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को एक तरफ जहां स्थायी रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ पशुपालकों को अपने ही गांव में विशेषज्ञ सेवाएं मिल सकेंगी।
उत्पादन और भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य: वर्तमान में करीब 12 लाख किसान दुग्ध उत्पादन से जुड़े हैं, जिसे बढ़ाकर 50 लाख से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय स्तर पर डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की लगभग 70 प्रतिशत भागीदारी है, जिसे बिहार में बढ़ाकर 80 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य है।
आर्थिक सहायता: मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत सुधा बिक्री केंद्र खोलने वाली महिलाओं को दूसरी और तीसरी किश्त मिलाकर करीब 60 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। साथ ही, सभी 534 प्रखंडों में पशु औषधि बिक्री केंद्र खोलने का अभियान भी शुरू किया गया है।
पशु सखियों की भूमिका: कॉम्फेड और जीविका के संयुक्त प्रयास से अब तक करीब 7 हजार जीविका दीदियों को डेयरी और पशुपालन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जो आगे चलकर लघु पशुओं के पालन में भी महिलाओं का मार्गदर्शन करेंगी। आगामी वर्ष तक राज्य की सभी 8,053 पंचायतों में सुधा सखियों का चयन पूर्ण कर लिया जाएगा।




