Spiritual Adda: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का पर्व माता दुर्गा की आराधना के लिए सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं और घर में सुख, शांति व समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना यानी घटस्थापना के साथ ही इस पावन उत्सव की शुरुआत होती है। सही विधि और शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
शुभ मुहूर्त और तिथि
पंचांग के अनुसार, इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से हो रही है। इसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। घटस्थापना के लिए मुख्य मुहूर्त और समय इस प्रकार हैं:
– प्रातः काल का शुभ मुहूर्त: सुबह 6:19 मिनट से 10:12 मिनट तक।
– अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 मिनट से दोपहर 12:31 मिनट तक।
आवश्यक पूजा सामग्री
घटस्थापना और नौ दिनों की पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होती है:
– मिट्टी का चौड़े मुंह वाला पात्र (गमला या बर्तन) और साफ उपजाऊ मिट्टी
– बोने के लिए साफ जौ
– मिट्टी या तांबे/पीतल का कलश
– गंगाजल और शुद्ध ताजा पानी
– सिक्का और साबुत सुपारी
– साबुत चावल (अक्षत) और दूर्वा घास
– रोली, कलावा (रक्षा सूत्र)
– आम या अशोक के पांच या सात ताजे पत्ते
– पानी वाला जटादार नारियल और उस पर लपेटने के लिए लाल कपड़ा या चुनरी
– पूजा के लिए फूल, फल, पान, इलायची, लौंग, मिठाई, बताशे और घी का दीपक
घटस्थापना की सरल विधि
– स्नान और सफाई: नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद अपने पूजा स्थल की अच्छी तरह से साफ-सफाई करें।
– चौकी स्थापना: एक साफ लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर उसका शुद्धिकरण करें और माता को फूल व चुनरी अर्पित करें।
– जौ बोना (खेती): मिट्टी के चौड़े पात्र में साफ मिट्टी डालें और उसमें जौ के दाने बो दें। इसके ऊपर मिट्टी की एक हल्की परत और डालकर थोड़ा सा जल छिड़कें। इस पात्र को पूजा स्थल पर स्थापित करें। नवरात्रि के नौ दिनों तक इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते रहें ताकि जौ अच्छी तरह अंकुरित हो सकें।
– कलश स्थापना: कलश के गले में कलावा (रक्षा सूत्र) बांधें। अब इसमें गंगाजल और शुद्ध पानी भरें। इसके अंदर सुपारी, सिक्का, अक्षत और हल्दी की गांठ डालें।
– पत्ते और नारियल रखना: कलश के मुख पर आम या अशोक के पांच या सात पत्ते सजाकर रखें। इसके ऊपर एक नारियल पर लाल कपड़ा या चुनरी लपेटकर कलावा बांधें और उसे कलश के ऊपर स्थापित कर दें।
– अंतिम चरण: अब इस तैयार कलश को जौ वाले पात्र के ठीक पास रख दें। इसके बाद मां दुर्गा के सामने घी का दीपक और धूप प्रज्वलित करें। अंत में माता को फल, फूल और मिठाई अर्पित कर उनके मंत्रों का जाप करें और आरती करें।
धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जौ को समृद्धि, बरकत और अच्छी फसल का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में जौ बोने की परंपरा को नई शुरुआत और खुशहाली से जोड़ा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जौ जितनी तेजी से और हरी-भरी उगती है, घर में उतनी ही सुख-समृद्धि आती है।





