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बिहार की 53 हजार जीविका दीदियां बनीं आत्मनिर्भर, स्कूल और आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए तैयार कर रहीं पोशाक

बिहार में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जीविका की ओर से कई तरह की गतिविधियां चलाई जा रही हैं। इसी के तहत सिलाई घर योजना के जरिए 53 हजार से अधिक जीविका दीदियां सिलाई के काम से जुड़ी हैं। ये महिलाएं सरकारी स्कूलों

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पटना : बिहार में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जीविका की ओर से कई तरह की गतिविधियां चलाई जा रही हैं। इसी के तहत सिलाई घर योजना के जरिए 53 हजार से अधिक जीविका दीदियां सिलाई के काम से जुड़ी हैं। ये महिलाएं सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए पोशाक तैयार कर रही हैं।

जीविका के माध्यम से करीब 50 हजार महिलाओं को यूनिफॉर्म सिलाई का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं, 1,732 महिलाओं को विशेष सिलाई प्रशिक्षण और 30 सदस्यों को सिलाई व प्रबंधन से जुड़ा उन्नत प्रशिक्षण दिया गया है।

इस काम को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए जीविका की ओर से जानकी जीविका महिला सिलाई उत्पादन कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया है। अब तक आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 79 लाख से अधिक यूनिफॉर्म सेट तैयार कर आपूर्ति किए जा चुके हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति और जनजाति स्कूलों के लिए करीब 1.10 लाख तथा अति पिछड़ा और पिछड़ा वर्ग के स्कूलों के लिए करीब 30 हजार पोशाक की आपूर्ति की गई है। सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए भी पोशाक तैयार कर उपलब्ध कराई गई है।

ग्रामीण विकास विभाग का लक्ष्य महिलाओं को सिर्फ बचत और ऋण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें रोजगार और उद्यमिता से जोड़ना है। सिलाई के साथ कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य गतिविधियों के जरिए ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका दीदियों की यह पहल सराहनीय है। आने वाले समय में सिलाई से जुड़ी महिलाओं की संख्या और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ गुणवत्ता, डिजाइन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि जीविका दीदियों के उत्पादों को बिहार के बाहर भी बाजार मिल सके।

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