Patna: धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं के महाकुंभ गयाजी के पितृपक्ष मेले को अब डिजिटल दुनिया के जरिए वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी है। बिहार सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित ‘पितृपक्ष मेला एक इन्फ्लुएंसर की नजर से’ प्रतियोगिता के तहत डिजिटल क्रिएटर्स और आम नागरिकों के लिए अपनी कला का हुनर दिखाने का शानदार अवसर सामने आया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के जरिए प्रतिभागी गयाजी के अनूठे धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप को दुनिया के सामने रख सकते हैं। विभाग की ओर से इस प्रतियोगिता के तहत कुल 10 विजेताओं के लिए 8.25 लाख रुपये की आकर्षक पुरस्कार राशि की घोषणा की गई है।
आस्था, परंपरा और गयाजी की विरासत को कैमरे में कैद करने का मौका
इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य गयाजी की सदियों पुरानी परंपराओं को आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों से जोड़ना है। प्रतिभागी पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म की पवित्र परंपराओं के साथ-साथ गयाजी के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों, स्थानीय खान-पान, आतिथ्य, जनजीवन और पर्यटन अनुभवों को अपनी रचनात्मक नजर से वीडियो, रील, फोटो और ब्लॉग के रूप में प्रस्तुत कर सकेंगे। पर्यटन विभाग का मानना है कि इस तरह के डिजिटल कंटेंट से गयाजी की महिमा देश-विदेश के कोने-कोने तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगी।
कंटेंट क्रिएटर्स से लेकर आम लोग भी ले सकेंगे हिस्सा
इस प्रतियोगिता में पेशेवर कंटेंट क्रिएटर्स, ट्रैवल ब्लॉगर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स के साथ-साथ आम लोग भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि, इसके लिए एक अनिवार्य शर्त यह रखी गई है कि प्रतिभागी के किसी भी एक सोशल मीडिया हैंडल पर कम से कम 25 हजार फॉलोअर्स होने आवश्यक हैं।
प्रतियोगिता में भाग लेने के इच्छुक प्रतिभागी अपनी प्रविष्टियां आगामी 11 अक्टूबर की शाम 5 बजे तक भेज सकते हैं।
कुल 10 विजेताओं को मिलेंगे 8.25 लाख रुपये के पुरस्कार
प्रतिस्पर्धा को रोमांचक और प्रोत्साहनपरक बनाने के लिए कुल 10 विजेताओं का चयन किया जाएगा, जिनके बीच 8.25 लाख रुपये के नकद पुरस्कार वितरित किए जाएंगे:
- प्रथम पुरस्कार: 3,00,000 रुपये (एक विजेता)
- द्वितीय पुरस्कार: 2,00,000 रुपये (एक विजेता)
- तृतीय पुरस्कार: 1,00,000 रुपये (एक विजेता)
- चौथा स्थान: 50,000 रुपये प्रत्येक (दो विजेता)
- पाँचवा स्थान (प्रशंसा पुरस्कार): 25,000 रुपये प्रत्येक (पाँच विजेता)
गयाजी की माटी की खुशबू, मोक्षधाम की दिव्यता और पितृपक्ष के आध्यात्मिक पन्नों को डिजिटल कैनवास पर उतारने के लिए यह सुनहरा अवसर है। समय सीमा नजदीक है, इसलिए योग्य प्रतिभागी तय समय-सीमा यानी 11 अक्टूबर की शाम 5 बजे से पहले अपनी प्रविष्टियां अवश्य भेजें।





