रांची: रांची के व्यवहार न्यायालय में मंगलवार को कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एकदिवसीय कार्यशाला और कानूनी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं को उनके अधिकार, सुरक्षा और शिकायत से जुड़ी जरूरी जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंत में नुक्कड़ नाटक के जरिए भी लोगों को जागरूक किया गया।
यह कार्यक्रम झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सह कार्यपालक अध्यक्ष, झालसा सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश और झालसा की सदस्य सचिव रंजना अस्थाना के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। रांची के न्यायायुक्त सह अध्यक्ष डालसा अनिल कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का संचालन किया गया।
कार्यक्रम 40 कोर्ट्स बिल्डिंग स्थित व्यवहार न्यायालय के कांफ्रेंस हॉल में झारखंड जिला न्यायालय जेंडर सेंसिटाइजेशन और महिलाओं के यौन उत्पीड़न से जुड़े नियम, 2026 के तहत हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दीप जलाकर की गई। मंच का संचालन न्यायिक दंडाधिकारी एकता सक्सेना ने किया।
POSH Act महिलाओं के लिए कानूनी सुरक्षा
न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा ने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देने के लिए केंद्र सरकार ने 2013 में POSH Act लागू किया है। यह कानून अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा देने के लिए महत्वपूर्ण है।
महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी
पहले सत्र में नासरीन जमाल ने POSH Act के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य कोर्ट परिसर में काम करने वाली और वहां आने वाली महिलाओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है।
इस दौरान जेंडर समानता, कार्यस्थल पर सुरक्षा और शिकायत करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। शिकायत के लिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और कानूनी सहायता जैसी व्यवस्थाओं के बारे में भी बताया गया।
संवैधानिक अधिकारों पर चर्चा
दूसरे सत्र में झारखंड हाईकोर्ट की अधिवक्ता आरती ने महिलाओं के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत समानता, भेदभाव से सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार के बारे में बताया।
यौन उत्पीड़न के मामलों की दी जानकारी
तीसरे सत्र में एजेसी-7 वर्धा ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों की जानकारी दी। उन्होंने बिना सहमति शारीरिक संपर्क, यौन संबंध का प्रस्ताव, अश्लील सामग्री दिखाने और यौन प्रकृति की टिप्पणियों जैसे मामलों के बारे में बताया।
मुफ्त कानूनी सहायता और हेल्पलाइन की जानकारी
चौथे सत्र में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश राजेश कुमार सिंह ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से मिलने वाली मुफ्त कानूनी सहायता, काउंसलिंग और कानूनी जागरूकता शिविरों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि महिलाएं, एससी-एसटी वर्ग के लोग, दिव्यांगजन और हिंसा से प्रभावित लोग मुफ्त कानूनी सहायता के पात्र हैं। उन्होंने महिला हेल्पलाइन नंबर 181 के बारे में भी जानकारी दी।
कार्यक्रम में पुलिस, अभियोजन और कानूनी सहायता के बीच समन्वय, पीड़ितों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और लोगों तक न्याय पहुंचाने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।
नुक्कड़ नाटक से किया जागरूक
कार्यक्रम के अंत में रंगमंच नाटक मंडली की टीम ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के जरिए महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और उनके अधिकारों को लेकर लोगों को जागरूक किया गया।



