रांची: राजधानी में बनने वाले तीन बड़े फ्लाईओवर का काम शुरू होने में अभी और समय लग सकता है। टेक्निकल और फाइनेंशियल बिड खुलने के बाद तीनों परियोजनाओं में कंपनियां L-1 बन चुकी हैं, लेकिन करीब 25 दिन बाद भी टेंडर फाइनल नहीं हुआ है। अभी किसी कंपनी को वर्क ऑर्डर भी जारी नहीं किया गया है।
बताया जा रहा है कि L-1 कंपनियों ने सरकार के शेड्यूल रेट से 17 से 25 फीसदी तक ज्यादा दर पर काम करने की पेशकश की है। इसी वजह से टेंडर की प्रक्रिया अटक गई है। तीनों फ्लाईओवर का टेंडर स्टेट हाईवे अथॉरिटी ऑफ झारखंड (SHAJ) ने जारी किया है।
तीनों फ्लाईओवर के लिए ये कंपनियां बनीं L-1
करमटोली-चिरौंदी फ्लाईओवर: करीब 3.216 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर की टेंडर वैल्यू 174.60 करोड़ रुपये है। इसके लिए शिवालया कंस्ट्रक्शन कंपनी L-1 बनी है। कंपनी ने शेड्यूल रेट से 17 फीसदी ज्यादा दर कोट की है।
अरगोड़ा-चापुटोली फ्लाईओवर: करीब 3.804 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर की टेंडर वैल्यू 223.14 करोड़ रुपये है। इसके लिए दिनेश चंद्र अग्रवाल इंफ्राकॉन L-1 बनी है। कंपनी ने भी 17 फीसदी ज्यादा दर कोट की है।
हरमू फ्लाईओवर: जज कॉलोनी से सहजानंद चौक तक बनने वाले इस फ्लाईओवर की टेंडर वैल्यू 326.61 करोड़ रुपये है। इसके लिए हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (HCC), मुंबई L-1 बनी है। कंपनी ने शेड्यूल रेट से 25 फीसदी ज्यादा दर दी है।
10 फीसदी से ज्यादा दर पर कैबिनेट की मंजूरी जरूरी
नियम के अनुसार शेड्यूल रेट से 10 फीसदी से ज्यादा दर पर काम देने के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होती है। इसी कारण टेंडर प्रक्रिया में समय लग रहा है। SHAJ के अधीक्षण अभियंता सुनील रजक के अनुसार, फिलहाल दरों का मूल्यांकन किया जा रहा है। मूल्यांकन और निगोसिएशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद टेंडर को अंतिम रूप देकर वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा।
सरकार पर करीब 139 करोड़ का अतिरिक्त बोझ
अगर कंपनियों को उनकी बढ़ी हुई दरों पर काम दिया जाता है, तो सरकार पर करीब 139 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। हरमू फ्लाईओवर में शेड्यूल रेट की तुलना में करीब 67 करोड़ रुपये अधिक खर्च होने का अनुमान है। वहीं, करमटोली-चिरौंदी और अरगोड़ा-चापुटोली फ्लाईओवर की लागत भी बढ़ सकती है।



