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लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ के आरोपी पूर्व JPSC अध्यक्ष खियांग्ते पहुंचे हाईकोर्ट

सीआईडी कोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी है जमानत, 2 करोड़ कमीशन और काली करतूतों के आरोप

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Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में धांधली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरे पूर्व अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते अब जेल से बाहर आने के लिए छटपटा रहे हैं। निचली अदालत से तगड़ा झटका लगने के बाद उन्होंने अब झारखंड उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की है। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने उनके खिलाफ लगे गंभीर आरोपों, जांच में मिले साक्ष्यों और अपराध की विभीषिका को देखते हुए उनकी जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया था।
जांच में यह कड़वी सच्चाई खुलकर सामने आई है कि संवैधानिक पद पर बैठे एल. खियांग्ते ने किस प्रकार लाखों युवाओं के सपनों और उम्मीदों की बलि चढ़ा दी। अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की जांच के अनुसार, खियांग्ते ने परीक्षा आयोजित कराने का अहम जिम्मा एक संदिग्ध और दागी कंपनी ‘टीडीपीएल’ (TDPL) को सौंपा। इतना ही नहीं, टीडीपीएल द्वारा आयोजित कराई जाने वाली परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली, सेटिंग-गेटिंग और पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। आयोग के सर्वोच्च पद पर रहते हुए खियांग्ते को इन सभी काली करतूतों की पूरी जानकारी थी, लेकिन युवाओं का भविष्य संवारने के बजाय उन्होंने आंखें मूंद लीं और धांधली को शह देते रहे।
सीआईडी के सनसनीखेज खुलासे के मुताबिक, एल. खियांग्ते ने इस काली सेटिंग का मूकदर्शक बने रहने और टीडीपीएल को फायदा पहुंचाने के बदले कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कमीशन बटोरा था। परीक्षा की पवित्रता बेचने के इस बड़े सिंडिकेट में उनकी सीधी संलिप्तता के पक्के सबूत हाथ लगने के बाद ही उन्हें सीआईडी ने गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेजा था।
निचली अदालत में खियांग्ते के वकीलों ने यह दलील देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की थी कि छापेमारी में कोई प्रत्यक्ष आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली। लेकिन सीआईडी ने कोर्ट के समक्ष केस डायरी और 6 बोरों में भरे ठोस सबूत पेश कर उनकी दलीलों की धज्जियां उड़ा दीं। जांच एजेंसी ने साफ कहा कि आरोपी बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उन्हें जमानत मिलने पर वे साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर जांच को प्रभावित कर सकते हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य का सौदा करने के आरोपी पूर्व अध्यक्ष को क्या हाईकोर्ट से कोई राहत मिलती है या फिर उन्हें अपनी इस करनी की सजा सलाखों के पीछे ही काटनी पड़ेगी।
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