Ranchi: झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नाम और दस्तावेजों से जुड़ी विसंगतियों को लेकर जारी नोटिस की सुनवाई पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को अत्यंत महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि नोटिस जारी होने के अलग-अलग तकनीकी कारणों के आधार पर आम मतदाताओं से बेवजह अलग-अलग कागजात न मांगे जाएं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने जोर देकर कहा कि इस पूरी सुनवाई प्रक्रिया का केंद्र केवल पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में दर्ज करना और उन्हें सुविधा प्रदान करना होना चाहिए। किसी भी मतदाता को जटिल प्रशासनिक व दस्तावेजी प्रक्रियाओं के कारण परेशानी का सामना न करना पड़े।
बैठक के दौरान के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची की सुनवाई में मुख्य रूप से केवल तीन आधारभूत मानकों पर ही पात्रता तय की जाएगी:
- नागरिकता: संबंधित व्यक्ति भारत का नागरिक है या नहीं।
- आयु सीमा: 1 अक्टूबर 2026 तक उसकी आयु 18 वर्ष पूरी हुई है या नहीं।
- सामान्य निवासी: क्या व्यक्ति संबंधित मतदान केंद्र (बूथ) क्षेत्र का सामान्य निवासी है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों (DEO), निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों (ERO) तथा सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों (AERO) को निर्देश दिया गया कि वे सुनवाई के दौरान इन्हीं तीन प्राथमिकताओं को ध्यान में रखें।
उन्होंने बताया कि गणना प्रपत्र में दर्ज गलत जानकारी, पुरानी एसआईआर में मैपिंग की गलतियों या पूर्व के डेटा में त्रुटि के कारण तार्किक विसंगतियां (Logical Errors) सामने आ सकती हैं। हालांकि, मौजूदा सुनवाई का उद्देश्य पिछली एसआईआर की गलतियों को सुधारना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य भारतीय नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए।
जिन मतदाताओं का पिछला रिकॉर्ड उपलब्ध है, उनकी पात्रता पुरानी मैपिंग के आधार पर सिद्ध की जा सकती है। इसके लिए केवल स्वयं मतदाता ही नहीं, बल्कि माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी के नाम की मैपिंग का सहारा भी लिया जाएगा। यदि बुजुर्ग मतदाताओं के पास अपने आवश्यक कागजात नहीं हैं, तो मतदाता सूची में दर्ज उनके बेटे-बेटियों के दस्तावेजों के आधार पर ‘रिवर्स मैपिंग’ (Reverse Mapping) करके सत्यापन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जिन मामलों में पुरानी मैपिंग मौजूद नहीं होगी, वहां चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित 11 अधिकृत दस्तावेजों के आधार पर ही जांच होगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिया कि जिन मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है, उनके अंतिम आदेश जल्द तैयार किए जाएं। केवल अपात्रता की श्रेणी में आने वाले मामलों में ही आवश्यकतानुसार दूसरा नोटिस भेजकर पुनः सुनवाई की जाएगी।
प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व सुलभ बनाने के लिए 10 अक्टूबर को राज्य के सभी मतदान केंद्रों पर ‘मेगा हेल्पडेस्क’ लगाया जाएगा। यहां तैनात कर्मचारी नागरिकों को नोटिस की सुनवाई, दावा-आपत्ति और नाम जोड़ने से जुड़ी जानकारी देंगे। इसके अलावा, जनजातीय समूहों, दिव्यांगों, बुजुर्गों और पिछड़े वर्गों के लिए विशेष आउटरीच अभियान चलाने तथा बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के माध्यम से फॉर्म-6, 7 और 8 के डिजिटाइजेशन में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।





