Paris, (France): यूरोपीय देश फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और सुविधाओं की कमी के खिलाफ स्कूली छात्रों यानी ‘जेन-जेड’ (Gen-Z) का विरोध-प्रदर्शन उग्र आंदोलन में बदल गया है। राजधानी पेरिस समेत देश के कई बड़े शहरों में छात्रों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुई हैं।
जगह-जगह आगजनी, तोड़फोड़ और पथराव की घटनाओं के बाद सुरक्षा बलों ने सैकड़ों प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में लिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने आपात बैठक बुलाई और सभी मंत्रियों के आधिकारिक सरकारी दौरे रद्द करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रशासन का पूरा ध्यान कानून-व्यवस्था बहाल करने पर केंद्रित रहे।
स्कूलों की बदहाली: लंबी क्लास और स्टाफ की कमी पर फूटा गुस्सा

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। जर्जर इमारतें, कक्षाओं में शिक्षकों व गैर-शैक्षणिक स्टाफ की भारी कमी और अत्यधिक लंबी कक्षाओं के चलते पढ़ाई का माहौल खराब हो चुका है। पेरिस के उपनगरीय इलाकों से शुरू हुआ यह असंतोष धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया। गुरुवार को इस आंदोलन में डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्र भी शामिल हो गए, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। पेरिस में दो स्कूलों की इमारतों को आग के हवाले किए जाने की सूचना के बाद प्रशासन ने 160 से अधिक स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किया है।
पेरिस से मार्सिले तक परिवहन व्यवस्था ठप: 30 यूनिवर्सिटी कैंपस बंद
छात्रों के उग्र प्रदर्शनों का सीधा असर फ्रांस की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली और उच्च शिक्षण संस्थानों पर पड़ा है। राजधानी पेरिस और दक्षिणी बंदरगाह शहर मार्सिले सहित करीब 30 प्रमुख विश्वविद्यालय परिसरों में छात्रों ने आवाजाही पूरी तरह रोक दी है। मार्सिले में छात्रों द्वारा सुबह के समय की गई तोड़फोड़ और चालकों पर हमलों के बाद स्थानीय प्रशासन को बस, ट्राम और मेट्रो सेवाएं पूरी तरह बंद करनी पड़ीं। पुलिस द्वारा स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए किए गए लाठीचार्ज और रबर की गोलियों के इस्तेमाल से कई छात्र घायल हुए हैं, जबकि पथराव में कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं।
आगामी राष्ट्रपति चुनाव पर असर: सरकार पर बढ़ा दोहरा दबाव
यह व्यापक जनाक्रोश ऐसे संवेदनशील समय पर भड़का है जब फ्रांस में आगामी राष्ट्रपति चुनाव की राजनीतिक हलचल तेज है। देश की कमजोर पड़ती आर्थिक स्थिति के बीच युवाओं के इस असंतोष ने सत्तारूढ़ दल के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। वहीं, विपक्षी वामपंथी नेता और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जीन-ल्यूक मेलेंशोन ने छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई को क्रूर और दमनकारी करार दिया है। इसके जवाब में सरकार समर्थित खेमे ने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि वे आगामी चुनावों में सियासी लाभ उठाने के लिए छात्रों को भड़काकर हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं।




