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सुबह-सुबह हिली अफगानिस्तान की धरती, 5.3 की तीव्रता से कांपे लोग!

अफगानिस्तान में गुरुवार सुबह 5.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र काबुल से 165 किलोमीटर दूर था, हालांकि अभी किसी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।

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Kabul, (Afghanistan): अफगानिस्तान में गुरुवार सुबह 6 बजकर 59 मिनट 20 सेकंड पर भूकंप के तेज झटके दर्ज किए गए। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 5.3 मापी गई। भूकंप का केंद्र राजधानी काबुल से लगभग 165 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में 35.981 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 68.700 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। यह हलचल जमीन के भीतर करीब 126 किलोमीटर की गहराई में दर्ज की गई। राहत की बात यह है कि अब तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है।

अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में भिन्नता

जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) ने इस भूकंप की तीव्रता 5.44 आंकी है और इसका केंद्र जमीन से महज 10 किलोमीटर नीचे बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, अलग-अलग एजेंसियों के गणना के तरीकों और सेंसर उपकरणों के चलते तीव्रता और गहराई के आंकड़ों में ऐसा अंतर आना सामान्य है। जमीन के कम गहराई में आने वाले भूकंप अमूमन सतह पर ज्यादा असर डालते हैं, लेकिन गहराई अधिक होने पर झटकों का फैलाव दूर तक होता है और सतह पर तबाही का जोखिम घट जाता है। फिलहाल स्थानीय प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

हिंदूकुश क्षेत्र में लगातार भूकंप का कारण

अफगानिस्तान का हिंदूकुश पहाड़ी इलाका भूकंप के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में गिना जाता है। यह क्षेत्र भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन स्थल पर स्थित है, जहां प्लेटों के आपस में टकराने से लगातार दबाव बनता रहता है। यही भूगर्भीय हलचल अफगानिस्तान और पाकिस्तान से लेकर पूरे हिमालयी क्षेत्र तक भूकंप का कारण बनती है। इस पूरे बेल्ट में कभी जमीन की ऊपरी सतह के पास तो कभी अत्यधिक गहराई में फॉल्ट लाइन सक्रिय हो जाती हैं।

नुकसान न होने से मिली बड़ी राहत

आमतौर पर भूकंप से होने वाला नुकसान केवल उसकी तीव्रता या गहराई पर निर्भर नहीं करता, बल्कि भवनों की मजबूती, केंद्र से आबादी की दूरी और मिट्टी की बनावट भी बड़ा कारक होती है। गुरुवार सुबह आए इन झटकों के बाद काबुल और आसपास के इलाकों में लोग सहम जरूर गए, लेकिन किसी इमारत के गिरने या हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। आपदा प्रबंधन एजेंसियां फील्ड स्तर से अतिरिक्त जानकारी जुटाने में लगी हैं।

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