Health Adda: कंप्यूटर, लैपटॉप और स्मार्टफोन की स्क्रीन के सामने घंटों बिताना अब आम दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी हों, वर्क फ्रॉम होम करने वाले पेशेवर या फिर ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्र—अधिकांश लोग दिनभर स्क्रीन के सामने गलत मुद्रा (पोस्चर) में बैठे रहते हैं। इस लाइफस्टाइल की वजह से ‘टेंशन हेडेक’ यानी तनाव संबंधी सिरदर्द के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। लगातार एक ही मुद्रा में बैठने और नीली रोशनी के सीधे संपर्क में रहने से गर्दन, कंधे, जबड़े और सिर की मांसपेशियों में खिंचाव पैदा हो रहा है, जो सिर के चारों तरफ एक कड़े बैंड जैसा दबाव बना देता है। इसे मेडिकल की भाषा में ‘टेक-नेक हेडेक’ भी कहा जा रहा है।
गर्दन झुकाने से रीढ़ पर 4 गुना ज्यादा वजन
चिकित्सकों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति मोबाइल देखते समय गर्दन को आगे झुकाता है या लैपटॉप पर काम करते वक्त कंधे उचकाकर बैठता है, तो गर्दन की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी पर सामान्य से तीन से चार गुना अधिक वजन पड़ता है। वर्क फ्रॉम होम के दौरान बिस्तर या सोफे पर झुककर काम करने से शरीर का प्राकृतिक एर्गोनॉमिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है। इसके अलावा, बिना पलक झपकाए लगातार स्क्रीन को देखने से आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सूखापन, जलन और माथे से लेकर गर्दन के पिछले हिस्से तक तेज दर्द फैल जाता है।
एर्गोनॉमिक्स पर ध्यान और 20-30 मिनट का ब्रेक
फिजियोथेरेपिस्ट इस समस्या से निपटने के लिए कार्यस्थल के एर्गोनॉमिक्स को सुधारने की सलाह दे रहे हैं। काम करते समय कुर्सी पर पीठ को पूरा सहारा देकर सीधा बैठना चाहिए और कंप्यूटर की स्क्रीन आंखों के ठीक सामने (आई-लेवल) होनी चाहिए, ताकि गर्दन झुकाने की जरूरत न पड़े। इसके अलावा, हर 20 से 30 मिनट के अंतराल पर कम से कम 20 सेकंड का ब्रेक लें। इस दौरान स्क्रीन से नजर हटाकर किसी दूर रखी वस्तु को देखें और गर्दन व कंधों की हल्की स्ट्रेचिंग जरूर करें।
हफ्ते में दो से तीन बार दर्द हो तो डॉक्टर से मिलें
अगर स्क्रीन टाइम कम करने, सही पोस्चर अपनाने और पर्याप्त आराम के बावजूद सिरदर्द की समस्या खत्म नहीं होती, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि यदि सिरदर्द हफ्ते में दो से तीन बार परेशान कर रहा है और काम करने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है, तो इसे केवल स्क्रीन की थकान न मानें। ऐसे मामलों में तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर जांच करानी चाहिए।




