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SIR नोटिस से हाहाकार, कांके ब्लॉक से जनप्रतिनिधि फरार, उप प्रमुख अजय बैठा के गायब रहने से भड़के ग्रामीण

कागजी चक्कर में उलझी कांके की जनता, खाली पड़ी उप प्रमुख की कुर्सी, विधायक और उपायुक्त तक पहुंचेगा मामला

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Ranchi: राजधानी से सटा कांके प्रखंड कार्यालय इन दिनों अव्यवस्था, प्रशासनिक उदासीनता और आम जनता की चीखों-पुकार का केंद्र बना हुआ है। एक तरफ विशेष प्रपत्र/SIR (विशेष जांच/सर्वेक्षण) नोटिस का जवाब देने के लिए रोजाना हजारों की संख्या में ग्रामीणों का हुजूम कांके ब्लॉक पहुंच रहा है, तो दूसरी तरफ जनता की सुध लेने वाले जनप्रतिनिधि अपने दफ्तरों से नदारद हैं। विशेषकर कांके प्रखंड के उप प्रमुख अजय बैठा और प्रमुख की लगातार अनुपस्थिति ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांके प्रखंड कार्यालय में कार्य करवाने के लिए लंबी कतार

वर्तमान में कांके ब्लॉक परिसर का आलम यह है कि सुबह 8 बजे से ही हजारों की भीड़ कतारों में खड़ी हो जाती है। किसी को अपना जाति, निवास या आय प्रमाण पत्र बनवाना है, तो किसी को SIR नोटिस के जवाब के लिए पारिवारिक वंशावली और वंशावली सूची सत्यापित करानी है। भारी बारिश और अव्यवस्था के बीच फंसे ग्रामीण, अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की चौखट पर चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों के कानों में जूं नहीं रेंग रही। स्थानीय बताते हैं कि कभी-कभी उप प्रमुख अजय बैठा का कार्यालय खुलता तो है लेकिन वह स्वयं नदारद रहते हैं। ऐसे में कार्य कैसे कराया जाए।

SIR नोटिस और प्रमाणपत्रों का संकट, उप प्रमुख की भूमिका अहम

झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 के तहत प्रखंड स्तर पर गठित पंचायत समिति में उप प्रमुख की भूमिका महज एक पद तक सीमित नहीं होती। अधिनियम के अनुसार, प्रमुख की अनुपस्थिति में उप प्रमुख के पास ही पंचायत समिति के समस्त प्रशासनिक और विकासात्मक दायित्वों के निर्वहन का अधिकार होता है। इस समय जब SIR नोटिस और पारिवारिक सूची सत्यापन को लेकर आम जनता पर गाज गिरी है, तब स्थानीय जनप्रतिनिधि के हस्ताक्षर और उनकी अनुशंसा ग्रामीणों के लिए संजीवनी का काम करती है।
उप प्रमुख अजय बैठा के नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित न रहने से प्रमाण पत्रों के सत्यापन, वंशावली की सिफारिश और जनता की शिकायतों के निपटारे का पूरा ढांचा चरमरा गया है। दूर-दराज की पंचायतों से पैसे भाड़ा लगाकर आने वाले दिहाड़ी मजदूर, महिलाएं और बुजुर्ग दिनभर भूखे-प्यासे बैठकर शाम को खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।
पुरुषों की भी लगी लंबी कतार

उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और विधायक सुरेश बैठा से होगी शिकायत

स्थानीय नागरिकों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। अजय बैठा के गैर-जिम्मेदाराना रवैये से नाराज ग्रामीणों और पंचायत समिति सदस्यों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जनता को सबसे ज्यादा जरूरत है, तब जनप्रतिनिधि एसी कमरों में दुबके हैं या अपने निजी कामों में व्यस्त हैं। आक्रोशित ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि वे जल्द ही रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और कांके के स्थानीय विधायक सुरेश बैठा से मुलाकात कर उप प्रमुख अजय बैठा और प्रमुख की कार्यशैली की लिखित शिकायत करेंगे और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग करेंगे।

पीड़ितों और प्रतिनिधियों का पक्ष

  1. थककर कई लोग बैठ भी गए

    रामेश्वर महतो (ग्रामीण, पिठोरिया):

    “हम पिछले चार कार्यदिवस से SIR नोटिस का जवाब तैयार करने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। वंशावली और पारिवारिक सूची में स्थानीय जनप्रतिनिधि के हस्ताक्षर की जरूरत है। उप प्रमुख अजय बैठा जी के दफ्तर का ताला ही नहीं खुलता। हर दिन भाड़ा खर्च करके आते हैं और शाम को मायूस होकर लौटना पड़ता है। सरकार ने इन्हें क्या इसीलिए कार्यालय उपलब्ध कराया है कि ये कार्यालय पर कब्जा कर प्रखंड कार्यालय से ही गायब रहें?”
  2. संगीता देवी (ग्रामीण, कदमा):
    “बच्चे के नामांकन के लिए जाति और आवासीय प्रमाण पत्र बनवाना बेहद जरूरी है। ब्लॉक में इतनी भीड़ है कि काउंटर तक पहुंचना मुश्किल है। सोचा था कि उप प्रमुख साहब से मिलकर अपनी बात रखेंगे और कागजात जल्दी आगे बढ़वाएंगे, लेकिन साहब का तो अता-पता ही नहीं है। अगर यही हाल रहा तो हमारे बच्चों का भविष्य अधर में लटक जाएगा।”
  3. सुरेश उरांव (ग्रामीण, कोल्हेया कनादू):
    “प्रखंड कार्यालय में इस समय हजारों की भीड़ है। एसआईआर नोटिस के कारण लोगों में हड़कंप मचा है। ऐसे समय में उप प्रमुख अजय बैठा का नियमित रूप से गायब रहना सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देना है। हम चुप बैठने वाले नहीं हैं, बहुत जल्द उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री जी से मिलकर इनकी अनुपस्थिति और लापरवाही की जांच की मांग करेंगे।”
  4. अमित कुमार (ग्रामीण, सुकुरहुट्‌टू):
    “पंचायत समिति का गठन आम जनता को सहूलियत देने के लिए हुआ था। अधिनियम के अनुसार प्रमुख और उप प्रमुख को ब्लॉक स्तर पर जनता के काम निपटाने चाहिए। अजय बैठा जी की गैर-मौजूदगी से पूरी पंचायत समिति की साख खराब हो रही है। जब ब्लॉक में अधिकारी और कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं, तब उप प्रमुख को यहां बैठकर जनता की ढाल बनना चाहिए था, न कि गायब होना चाहिए था।”
  5. मो. असलम (ग्रामीण, पतराटोली):
    “विधायक सुरेश बैठा जी को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। उनके क्षेत्र की जनता ब्लॉक के चक्कर काट-काटकर बेहाल है और उप प्रमुख अपने दफ्तर से नदारद हैं। अगर दो दिनों के भीतर व्यवस्था नहीं सुधरी तो हम ब्लॉक परिसर में ही धरना देंगे और उपायुक्त महोदय के समक्ष जाकर अपनी व्यथा सुनाएंगे।”
उप प्रमुख अजय बैठा का बंद कार्यालय

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल

कांके प्रखंड में उप प्रमुख और प्रमुख की गैर-मौजूदगी केवल एक व्यक्ति की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि यह पंचायती राज व्यवस्था के मूल उद्देश्यों पर प्रहार है। जब राज्य सरकार और जिला प्रशासन पारदर्शी शासन का दावा कर रहे हैं, तब राजधानी से महज कुछ किलोमीटर दूर स्थित कांके ब्लॉक में अजय बैठा जैसे जनप्रतिनिधियों का गायब रहना पूरे तंत्र की पोल खोलता है। अब देखना यह होगा कि रांची उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और विधायक सुरेश बैठा इस जन-समस्या पर क्या संज्ञान लेते हैं और कांके की जनता को इस नारकीय स्थिति से कब राहत मिलती है।
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