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बिहार बनेगा नया टेक हब: ताइवान और दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनियां कतार में

ताइवान और दक्षिण कोरिया की टेक कंपनियां बिहार में सेमीकंडक्टर, आईटी और एआई विनिर्माण में निवेश की इच्छुक हैं; राज्य में बोधगया क्लस्टर और वैशाली इलेक्ट्रॉनिक सिटी के जरिए मजबूत ढांचा तैयार किया जा रहा है।
बिहार बनेगा सेमीकंडक्टर हब
ताइवान-कोरिया की कंपनियां इच्छुक (AI इमेज)

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Patna: बिहार पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़कर अब हाई-टेक और सेमीकंडक्टर विनिर्माण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीतियों के चलते ताइवान और दक्षिण कोरिया की प्रमुख टेक कंपनियों ने बिहार में निवेश और इकाइयां स्थापित करने में रुचि दिखाई है। सेमीकंडक्टर चिप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी वैश्विक कंपनियां राज्य को अपने नए मैन्युफैक्चरिंग बेस के रूप में देख रही हैं।

सेमीकॉन इंडिया 2026 में पेश हुआ औद्योगिक खाका

नई दिल्ली में आयोजित ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ में बिहार के उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने राज्य में प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों के लिए तैयार इकोसिस्टम का ब्योरा रखा। उन्होंने कहा कि बिहार अब केवल तकनीकी उत्पादों का उपभोक्ता बनकर नहीं रहेगा, बल्कि निर्माता की भूमिका निभाएगा। राज्य की सेमीकंडक्टर, आईटी और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीतियां आधुनिक विनिर्माण, चिप असेंबलिंग और डिजाइनिंग यूनिट्स को आकर्षित करने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं।

बोधगया और वैशाली में तैयार हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर

सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Fab), असेंबली और टेस्टिंग यूनिट्स को जमीन पर उतारने के लिए बड़े बुनियादी ढांचे पर काम चल रहा है। इसके तहत बोधगया में 1,700 एकड़ में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है, जबकि वैशाली के राजापाकर में डेडिकेटेड ‘इलेक्ट्रॉनिक सिटी’ बनाई जा रही है। इस मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से बिहार को राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मानचित्र पर अहम जगह मिलने और राज्य के युवाओं के लिए लाखों उच्च-कुशल (High-Skill) तकनीकी रोजगार सृजित होने की राह खुलेगी।

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