सीवान: बिहार के सीवान जिले के मैरवा प्रखंड के गोपालचक की रहने वाली सलमा खातून की कहानी इन दिनों चर्चा में है। मुस्लिम परिवार में जन्मीं सलमा अब भगवान कृष्ण की भक्ति में समय बिताती हैं। वह माला जपती हैं, तुलसी की माला पहनती हैं और कृष्ण भक्ति को अपने जीवन का अहम हिस्सा मानती हैं।
सलमा के अनुसार, उनके जीवन में यह बदलाव अयोध्या यात्रा के बाद आया। वह पहली बार अयोध्या गई थीं। वहां कुछ दिनों तक धार्मिक परिसर में प्रवेश नहीं कर पाने के कारण वह काफी भावुक हो गई थीं।
अयोध्या से लौटते समय एक दुकान पर उनकी नजर भगवान गोपाल की मूर्ति पर पड़ी। मूर्ति को हाथ में लेने के बाद उन्हें उसे अपने साथ ले जाने का मन हुआ, लेकिन साथ मौजूद लोगों ने ऐसा करने से मना कर दिया। बाद में मूर्ति वहीं छोड़कर लौटने के बाद सलमा को काफी बेचैनी महसूस हुई।
इसके बाद उन्हें वृंदावन जाने की इच्छा होने लगी। कुछ समय बाद वह दिल्ली गईं और वहां से पहली बार वृंदावन पहुंचीं। सलमा ने अकेले वृंदावन घूमकर बांके बिहारी मंदिर में दर्शन किए। उनका कहना है कि कृष्ण भक्ति से उन्हें मन की शांति और खुशी मिलती है।
सलमा कहती हैं कि कृष्ण के सामने आने पर वह बाकी सब कुछ भूल जाती हैं। वह अपने इस आध्यात्मिक सफर को किसी योजना का हिस्सा नहीं मानतीं, बल्कि इसे भगवान की कृपा बताती हैं।
सलमा की जिंदगी का एक और पहलू खेल से जुड़ा है। उन्हें बचपन से खेलों में रुचि रही है। फिलहाल वह रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स अकादमी में बच्चों को प्रशिक्षण देती हैं। खेल के मैदान में बच्चों को अनुशासन और मेहनत सिखाने के साथ-साथ वह अपने निजी जीवन में कृष्ण भक्ति में भी समय बिताती हैं।
सलमा के लिए यह सफर किसी पहचान को बदलने की कोशिश नहीं, बल्कि उनका निजी आध्यात्मिक अनुभव है। वह कहती हैं कि कृष्ण भक्ति से उन्हें बहुत सुकून मिलता है।




