Ranchi: झारखंड के घर-घर तक स्वच्छ और निर्बाध जलापूर्ति पहुंचाने के लिए राज्य का पेयजल एवं स्वच्छता विभाग अब उच्च अकादमिक संस्थानों की तकनीकी विशेषज्ञता का सहारा लेने जा रहा है। नेपाल हाउस स्थित विभागीय कार्यालय में सचिव अबु इमरान की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। विभाग की संचालन एवं रख-रखाव नीति को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से IIT (ISM) धनबाद, निर्मला कॉलेज रांची और रांची विश्वविद्यालय के प्रख्यात प्रोफेसरों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इस रणनीतिक पहल के तहत जल्द ही तीनों प्रतिष्ठित संस्थानों को विभाग का ‘नॉलेज पार्टनर’ बनाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया जाएगा।
विभागीय सचिव अबु इमरान ने स्पष्ट किया कि शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों के जुड़ने से राज्य में क्रियान्वित की जा रही पेयजल योजनाओं की गुणवत्ता में सीधा सुधार आएगा और आम नागरिकों को नियमित रूप से स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।
इस साझेदारी के तीन मुख्य आधार होंगे:
- तकनीकी समाधान और मॉनिटरिंग: जलापूर्ति नेटवर्क की पाइप लाइनों में लीकेज का सटीक पता लगाने, नई योजनाओं के बेहतर डिजाइन और रखरखाव से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों पर IIT और विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ अपनी वैज्ञानिक सलाह देंगे।
- जल गुणवत्ता पर अनुसंधान: झारखंड के कई जिलों के भूजल में अत्यधिक आयरन, फ्लोराइड और हाई TDS जैसी गंभीर समस्याएं मौजूद हैं। इन समस्याओं के स्थायी उपचार और वाटर प्यूरिफिकेशन के लिए संयुक्त रिसर्च प्रोग्राम चलाया जाएगा।
- पर्यावरण और जल स्रोतों की स्थिरता: धनबाद और झरिया जैसे अत्यधिक खनन प्रभावित (Mining Zones) इलाकों में पर्यावरणीय क्षरण के कारण स्थानीय जल स्रोतों पर बुरा असर पड़ रहा है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में जल स्रोतों की दीर्घकालीन स्थिरता (Sustainability) सुनिश्चित करने के लिए विशेष कार्य योजना तैयार की जाएगी।



