नई दिल्ली: 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शासन में बदलाव के लिए 10 बड़े प्रस्ताव रखे। उन्होंने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को ‘विशेषाधिकारों का पिरामिड’ बताते हुए इसे ‘साझेदारी के मंच’ में बदलने की जरूरत बताई।
PM मोदी ने कहा कि अगले शिखर सम्मेलन तक ‘BRICS सुधार रोडमैप’ तैयार किया जाना चाहिए। यह रोडमैप प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने के तीन सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।
UNSC में सुधार पर जोर
प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों को जल्द लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सुधारों के लिए समय-सीमा और स्पष्ट लक्ष्य तय होने चाहिए।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में ग्लोबल साउथ की भागीदारी बढ़ाने की भी बात कही। PM मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ को सिर्फ नियम मानने वाला नहीं, बल्कि नियम बनाने वाला भी बनना चाहिए।
उन्होंने AI, अंतरिक्ष, बायोटेक्नोलॉजी और साइबरस्पेस जैसे नए क्षेत्रों के नियम तय करने में सभी देशों की समान भागीदारी की जरूरत बताई।
नाविकों के लिए आपातकालीन नेटवर्क
PM मोदी ने समुद्री व्यापार में काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा के लिए ‘Emergency Assistance Network for Seafarers’ बनाने का प्रस्ताव दिया।
इस नेटवर्क के जरिए संकट के समय नौसैनिक अधिकारियों और कूटनीतिक मिशनों के बीच बेहतर समन्वय हो सकेगा। इससे नाविकों को तुरंत अलर्ट, मेडिकल मदद और सुरक्षित निकासी जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी।
BRICS में ट्रोइका व्यवस्था का सुझाव
BRICS की 20वीं वर्षगांठ का जिक्र करते हुए PM मोदी ने संगठन में निरंतरता बनाए रखने के लिए ‘ट्रोइका’ व्यवस्था का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि अध्यक्षता बदलने के बाद भी पुराने फैसलों पर काम जारी रहना चाहिए। इसके लिए फैसलों, समय-सीमा और उनके क्रियान्वयन की स्थिति दर्ज करने वाला एक सुरक्षित डिजिटल संग्रह बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया।
PM मोदी ने कहा कि BRICS किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी देशों को साथ लेकर आगे बढ़ने के लिए बना है।




