रांची: जमीन के दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि मौजूदा समय में ऑनलाइन म्यूटेशन आवेदन करना कानून के तहत मान्य है। राजस्व अधिकारियों का ऑनलाइन आवेदन पर जोर देना भी नियमों के खिलाफ नहीं है।
यह मामला जमशेदपुर के मानगो इलाके की एक जमीन से जुड़ा था। जमीन के म्यूटेशन के लिए दिए गए ऑफलाइन आवेदन को स्वीकार नहीं किया गया था। इसके बाद आवेदक ने हाईकोर्ट का रुख किया।
मामले की सुनवाई जस्टिस आनंद सेन की अदालत में हुई। कोर्ट ने कहा कि संबंधित कानून 1973 में बनाया गया था, उस समय ऑनलाइन व्यवस्था मौजूद नहीं थी। आज डिजिटल व्यवस्था प्रशासनिक कामकाज का अहम हिस्सा बन चुकी है।
राज्य सरकार ने भी ऑनलाइन म्यूटेशन व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि इससे जमीन के रिकॉर्ड में पारदर्शिता आती है और पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखना आसान होता है।
हालांकि, कोर्ट ने डिजिटल सुविधा से दूर लोगों की परेशानी को भी ध्यान में रखा। अदालत ने कहा कि जरूरत पड़ने पर लोग प्रज्ञा केंद्र, कानूनी सहायता केंद्र या पैरा-लीगल वालंटियर की मदद ले सकते हैं।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को ऑनलाइन म्यूटेशन आवेदन करने का निर्देश दिया। साथ ही संबंधित अधिकारी को आवेदन मिलने के बाद नियमानुसार फैसला लेने और इसकी जानकारी आवेदक को देने को कहा। इसके साथ ही मामले का निपटारा कर दिया गया।




