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बिहार में 5 एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन की पहले होगी जांच, जानिए क्या है पूरा आदेश

राजस्व विभाग ने जमाबंदी शुद्धिकरण में तेजी लाने के साथ 5 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि का प्राथमिकता से भौतिक सत्यापन और जाली दस्तावेजों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

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Patna: बिहार में जमाबंदी शुद्धिकरण और सरकारी भूमि के सत्यापन को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। विभाग के सचिव जय सिंह ने अंचल अधिकारियों को लंबित राजस्व मामलों का तेजी से और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन करने का निर्देश दिया है। उन्होंने खास तौर पर 5 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली सरकारी भूमि का प्राथमिकता के आधार पर भौतिक सत्यापन शुरू करने को कहा है। राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान, शास्त्रीनगर, पटना में गुरुवार को बेगूसराय, मधुबनी और जमुई के सभी अंचल अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई। इसमें जमाबंदी शुद्धिकरण, सरकारी भूमि की पहचान, जमाबंदी नामांतरण और अन्य राजस्व सेवाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

मौजा-वार अभियान चलाकर होगा जमाबंदी शुद्धिकरण

सचिव जय सिंह ने कहा कि जमाबंदी में त्रुटियां आम लोगों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनती हैं। इसलिए मौजा-वार विशेष अभियान चलाकर सभी जमाबंदियों का शुद्धिकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की प्रवृत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।

5 एकड़ से बड़ी सरकारी जमीन पहले होगी सत्यापित

सरकारी भूमि के भौतिक सत्यापन की समीक्षा के दौरान सचिव ने निर्देश दिया कि 5 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली सरकारी भूमि के सत्यापन का काम प्राथमिकता से शुरू किया जाए। सरकारी प्लॉट से संबंधित जमाबंदियों की भी जांच कर उनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया। इसके अलावा लॉक की गई जमाबंदियों को नियमानुसार अनलॉक करने की कार्रवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया गया।

मृत रैयतों की जमाबंदी पर भी अभियान

बैठक में मृत रैयतों की जमाबंदी के लंबित मामलों को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए। सचिव ने ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तराधिकार और बंटवारा नामांतरण की कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने कहा कि मृत रैयतों की जमाबंदी को वर्षों तक लंबित रखना व्यवस्था की गंभीर कमी है। ऐसे मामलों का अभियान चलाकर निष्पादन किया जाए।

जाली दस्तावेजों पर कार्रवाई की निगरानी

दाखिल-खारिज आवेदनों में गलत प्रश्नावली भरने के मामलों में संबंधित लोगों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया। वहीं, जाली या कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के मामलों की भी समीक्षा हुई। सचिव ने ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई करने और दर्ज प्राथमिकी की स्थिति की लगातार निगरानी करने को कहा।

विवादित जमीन की मापी में पारदर्शिता पर जोर

समीक्षा के दौरान कर्मचारियों की के.सी. डायरी और मोबाइल ऐप के माध्यम से के.सी. उपस्थिति दर्ज करने की स्थिति भी देखी गई। विवादित भूमि की मापी से संबंधित फीडबैक को गंभीरता से लेने और मापी कार्य में पारदर्शिता व निष्पक्षता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। सचिव ने कहा कि राजस्व सेवाओं में देरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। इसलिए सभी अंचल अधिकारी नियमित निगरानी करें और हर लंबित कार्य का समयबद्ध तरीके से निष्पादन सुनिश्चित करें। बैठक में सचिव सीमा त्रिपाठी, भू-अर्जन निदेशालय के निदेशक कमलेश कुमार, सहायक निदेशक सह अपर सचिव आजीव वत्सराज, अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल, उप निदेशक मोना झा, विशेष कार्य पदाधिकारी नवाजिश अख्तर, अनुपम प्रकाश, उप सचिव अविनाश कुमार समेत तीनों जिलों के सभी अंचल अधिकारी मौजूद रहे।

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