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धान रोपनी के लिए राउरकेला जा रही थीं 6 नाबालिग, RPF ने किया रेस्क्यू

Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत कार्रवाई करते हुए टाटा-इतवारी एक्सप्रेस से छह नाबालिग बच्चियों को रेस्क्यू किया। बच्चियां बिना अभिभावकों को जानकारी दिए राउरकेला में धान रोपनी का काम करने और पैसे कमाने

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Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत कार्रवाई करते हुए टाटा-इतवारी एक्सप्रेस से छह नाबालिग बच्चियों को रेस्क्यू किया। बच्चियां बिना अभिभावकों को जानकारी दिए राउरकेला में धान रोपनी का काम करने और पैसे कमाने के लिए जा रही थीं। सभी बच्चियों की उम्र 12 से 14 वर्ष के बीच है।

जानकारी के अनुसार, 8 अगस्त को आरपीएफ को सूचना मिली थी कि ट्रेन संख्या 18109 टाटा-इतवारी एक्सप्रेस में कुछ नाबालिग बच्चियां यात्रा कर रही हैं। सूचना के आधार पर उप निरीक्षक इंद्रजीत कुमार, सहायक उप निरीक्षक एसएन यादव और आरपीएफ पोस्ट मनोहरपुर के ड्यूटी स्टाफ ने प्रभारी के पर्यवेक्षण में कार्रवाई शुरू की। अभियान में एएसआई कमलेश राम, जीआरपी मनोहरपुर के जवान तथा रेलवे चाइल्ड हेल्पलाइन पश्चिमी सिंहभूम के प्रतिनिधि मनोज कुमार दास और फणींद्र बराइक के अलावा Aspire NGO की टीम भी शामिल रही।

ट्रेन के मनोहरपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या एक पर करीब 11:54 बजे पहुंचने के बाद आरपीएफ और सहयोगी टीम ने कोच संख्या एस-2 की जांच की। इस दौरान छह नाबालिग बच्चियां संदिग्ध परिस्थितियों में बैठी मिलीं। पूछताछ में बच्चियों ने बताया कि वे अपने माता-पिता को बिना बताए राउरकेला जा रही थीं। उनका कहना था कि वहां धान रोपनी के काम से पैसे कमाने की योजना थी। बच्चियों के पास किसी तरह का सामान या लगेज भी नहीं मिला।

रेस्क्यू की गई बच्चियों में नेमलेन चेरोवा, उम्र 12 वर्ष, पुलो चेरोवा, 13 वर्ष, बिस्वास सोरेन, 13 वर्ष, सुमिता सोरेन, 14 वर्ष, निमंती चेरोवा, 12 वर्ष और अलिता चेरोवा, 14 वर्ष शामिल हैं। सभी बच्चियां पटनिया गांव, थाना गोइलकेरा, पश्चिमी सिंहभूम की रहने वाली बताई गई हैं।

आरपीएफ ने सभी बच्चियों को ट्रेन से उतारकर सुरक्षित रूप से आरपीएफ पोस्ट मनोहरपुर पहुंचाया। इसके बाद जीआरपी मनोहरपुर और रेलवे चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम की मौजूदगी में आवश्यक पूछताछ और प्रक्रिया पूरी की गई। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सभी छह नाबालिग बच्चियों को रेलवे चाइल्ड हेल्पलाइन, पश्चिमी सिंहभूम के प्रतिनिधियों मनोज कुमार दास और फणींद्र बराइक को सौंप दिया गया, ताकि आगे की आवश्यक बाल संरक्षण प्रक्रिया पूरी की जा सके।

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