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मिथिला मखाना ने पार किया समंदर, पहली खेप ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना

बिहार से जीआई टैग वाले मिथिला मखाना की 18 मीट्रिक टन पहली समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया रवाना हुई। सरकार ने सीधे निर्यात और किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया।

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Patna: बिहार के मखाना को अब सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार, 7 अगस्त को बिहटा स्थित आधुनिक इंटीग्रेटेड इर्रेडिएशन-कम-पैकहाउस (कॉमन फैसिलिटी सेंटर) से 18 मीट्रिक टन जीआई-टैग मिथिला मखाना की पहली समुद्री निर्यात खेप ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना की। राज्य सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में अधिकाधिक मखाना का निर्यात सीधे बिहार से कराने का है।

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कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह सिर्फ एक निर्यात खेप नहीं है, बल्कि बिहार के किसानों की मेहनत, उद्यमियों की प्रतिबद्धता और राज्य की कृषि क्षमता को वैश्विक स्तर पर सामने लाने की पहल है। उनके अनुसार, इससे कृषि उत्पादों के निर्यात को गति मिलेगी और किसानों की आय के साथ रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे।

बिहार से सीधे होगा मखाना का निर्यात

विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि अब तक बिहार में उत्पादित मखाना का निर्यात दूसरे राज्यों के माध्यम से किया जाता रहा है। अब राज्य सरकार चाहती है कि आने वाले समय में अधिक से अधिक मखाना सीधे बिहार से विदेश भेजा जाए। इसके लिए जरूरी आधारभूत संरचना को मजबूत किया जा रहा है। निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी सरल और सुगम बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

कृषि मंत्री के अनुसार, बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन में करीब 90 प्रतिशत योगदान देता है। मिथिला मखाना अपनी गुणवत्ता, पोषण मूल्य, कम वसा, ग्लूटेन-रहित गुणों और एंटीऑक्सीडेंट विशेषताओं के कारण वैश्विक स्तर पर सुपर फूड के रूप में लोकप्रिय हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया भेजी गई यह खेप एशिया-प्रशांत क्षेत्र सहित अन्य विकसित देशों के बाजारों में बिहार के मखाना की पहुंच मजबूत करने की दिशा में एक कदम है। आने वाले समय में अन्य देशों में भी मखाना के निर्यात को बढ़ाने की बात कही गई है।

किसानों और उद्यमियों को मिलेगा प्रशिक्षण

मंत्री ने कहा कि मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात से जुड़े किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, उद्यमियों और निर्यातकों को व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रसंस्करण, गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसका उद्देश्य बिहार के कृषि उत्पादों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार करना है। कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, वैज्ञानिक खेती, गुणवत्ता सुधार, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और उत्पादन के बाद प्रबंधन से जुड़ा तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रहा है।

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निर्यात बढ़ने से रोजगार के अवसर

विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार कृषि उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और कृषि उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा देना चाहती है। ग्रामीण स्तर पर मखाना की खरीद-बिक्री व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा। उनके अनुसार, कृषि उत्पादों के निर्यात में वृद्धि से किसानों को बेहतर मूल्य, स्थायी बाजार और रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को उत्पादन से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक की पूरी मूल्य श्रृंखला से जोड़ना है। उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात के रास्ते में आने वाली बाधाओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने की बात मंत्री ने कही।

बिहार के कृषि उत्पादों को वैश्विक पहचान देने पर जोर

कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार की मिट्टी की खुशबू और यहां के कृषि उत्पादों की विशिष्ट पहचान को विश्व स्तर पर स्थापित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ एक निर्यात गतिविधि नहीं है, बल्कि बिहार में कृषि उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान बिहार से जीआई-टैग और मूल्य संवर्धित मखाना का अमेरिका, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, न्यूजीलैंड और अब ऑस्ट्रेलिया को सफलतापूर्वक निर्यात किया जा चुका है।

मंत्री के अनुसार, इससे बिहार की पहचान देश के सबसे बड़े मखाना उत्पादक राज्य के साथ कृषि उत्पादों के निर्यात के क्षेत्र में भी मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बिहार के अन्य कृषि उत्पाद भी दुनिया के प्रमुख बाजारों तक पहुंचेंगे। इससे राज्य के किसानों की आय और समृद्धि में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद जताई गई है।

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