New Delhi: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हुईं और दोबारा राज्यसभा सांसद बनीं सुष्मिता देव ने अपनी राजनीतिक यात्रा और पार्टी बदलने के फैसले पर विस्तार से बात की। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी छोड़ने के बाद वह कांग्रेस में लौटने पर भी विचार कर रही थीं, लेकिन बाद में बीजेपी में शामिल होने का निर्णय लिया।
सुष्मिता देव ने टीएमसी छोड़ने की क्या वजह बताई?
सुष्मिता देव ने दावा किया कि वह पश्चिम बंगाल में जमीनी स्तर की राजनीति नहीं कर रही थीं और उन्हें लगा कि टीएमसी के लिए बंगाल से बाहर संगठन का विस्तार करना मुश्किल है। उनके अनुसार, उस समय उनके सामने कांग्रेस और बीजेपी में से किसी एक को चुनने का विकल्प था।
बीजेपी में शामिल होने का फैसला कैसे लिया?
सुष्मिता देव के अनुसार, उन्हें लगा कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में बीजेपी की स्वीकार्यता बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत के बाद उन्हें लगा कि यदि अगले 10 से 15 वर्षों तक अपने क्षेत्र के लोगों के लिए काम करना है, तो बीजेपी उनके लिए उपयुक्त विकल्प है।
‘मुझे भगवा से एलर्जी थी’ बयान पर क्या कहा?
सुष्मिता देव ने कहा कि छात्र राजनीति के दौरान वह एबीवीपी के खिलाफ थीं और उन्हें “भगवा से एलर्जी” थी। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था और विचारधाराओं को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोणों को जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता अतीत में केशव बलिराम हेडगेवार की शाखा में गए थे, लेकिन कांग्रेस इस बात को स्वीकार नहीं करती।
कांग्रेस और टीएमसी को लेकर क्या बोले?
सुष्मिता देव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव के बाद समीक्षा बैठकें तो करती है, लेकिन निर्णयों को लागू करने के स्तर पर अंदरूनी सहमति की कमी रहती है। वहीं टीएमसी के बारे में उन्होंने दावा किया कि पार्टी में चर्चा के लिए बहुत कम मंच हैं और निर्णय लेने की शक्ति एक व्यक्ति के हाथ में केंद्रित है।
बीजेपी की कार्यप्रणाली पर क्या कहा?
बीजेपी को लेकर आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए सुष्मिता देव ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि पार्टी में केवल दो नेताओं की ही भूमिका है। उनके अनुसार, सांसदों के पास अपने-अपने गार्जियन मंत्री होते हैं, जिनसे वे अपने क्षेत्र की समस्याओं पर चर्चा कर सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि संगठनात्मक ढांचा और संघ परिवार का जमीनी नेटवर्क पार्टी की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सुष्मिता देव ने कांग्रेस पर एक परिवार के नेतृत्व वाला दल होने का आरोप भी लगाया। वहीं उन्होंने दावा किया कि बीजेपी की विचारधारा का आधार संघ परिवार है, जिसे उन्होंने एक बड़े संस्थागत ढांचे के रूप में बताया।





