Ranchi: नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों को एक ही दिन में दो बड़ी सफलताएं मिली हैं। भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य और 2.20 करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली मिसिर बेसरा को दो सहयोगियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं, सारंडा क्षेत्र में सक्रिय 24 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी धनबाद और गिरिडीह की सीमा पर स्थित मनियाडीह इलाके में हुई। वह अपने सहयोगियों के साथ वाहन से गिरिडीह की ओर जा रहा था। इसी दौरान चेकिंग में सुरक्षा बलों ने उसे दो सहयोगियों के साथ पकड़ लिया।
खुफिया एजेंसियों और राज्य पुलिस ने चलाया संयुक्त ऑपरेशन
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के लिए केंद्रीय खुफिया एजेंसियों और राज्य पुलिस मुख्यालय के समन्वय से संयुक्त ऑपरेशन चलाया गया था। सुरक्षा बल लंबे समय से उसकी तलाश कर रहे थे। गिरिडीह के पीरटांड़ निवासी मिसिर बेसरा पिछले करीब 40 वर्षों से माओवादी संगठन में सक्रिय था। वह देश भर में माओवादी संगठन का अंतिम बचा हुआ पोलित ब्यूरो सदस्य था। उसके खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर झारखंड में एक करोड़ रुपये और ओडिशा में 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इस तरह उस पर कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम था।
2009 में कोर्ट परिसर पर हमला कर छुड़ा ले गए थे नक्सली
मिसिर बेसरा को इससे पहले सितंबर 2007 में भी गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, 2009 में लखीसराय कोर्ट परिसर पर हमला कर नक्सली उसे छुड़ा ले गए थे। इसके बाद से वह बूढ़ापहाड़, कोल्हान और सारंडा के जंगलों से अपनी गतिविधियां चला रहा था। हाल के दिनों में आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों और खुफिया जानकारियों के आधार पर सुरक्षा बलों ने उसे घेरने की रणनीति तैयार की थी। सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के साथ मिलकर इस रणनीति को अंजाम दिया गया। आखिरकार मनियाडीह इलाके में वाहन चेकिंग के दौरान मिसिर बेसरा सुरक्षा बलों की गिरफ्त में आ गया।
इधर सारंडा में 24 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
इसी बीच सारंडा क्षेत्र में सक्रिय 24 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। शीर्ष नेतृत्व पर कार्रवाई और 24 कैडरों के एक साथ सरेंडर को माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सुरक्षा बल मिसिर बेसरा और उसके दोनों सहयोगियों को कड़ी सुरक्षा के बीच रांची ले गए हैं। वहां उनसे आगे पूछताछ की जा रही है। इस कार्रवाई को देश में नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




