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जमीन के ‘खूनी खेल’ में बंगाल से धराया मास्टरमाइंड महताब उर्फ हड्डी, बैकड्रॉप में रसूख और हथियार!

सरेराह गोलियों की तड़तड़ाहट के बाद बैकफुट पर कानून-व्यवस्था, हथियारों के सिंडिकेट की जांच में जुटी पुलिस, कई बेनामी प्रॉपर्टीज आ सकती हैं रडार पर

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची का कांके इलाका एक बार फिर हिंसक जमीन विवाद और सरेआम हुई गोलीबारी की घटना से दहल उठा है। कांके थाना क्षेत्र के सुकुरहुट्टू में जमीन के एक टुकड़े को लेकर हुए खूनी संघर्ष के बाद अपराधियों के बेखौफ हौसलों ने स्थानीय पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सार्वजनिक स्थान पर हुई इस अंधाधुंध फायरिंग की घटना के मुख्य आरोपी महताब आलम उर्फ महताब अंसारी (उर्फ हड्डी / पप्पू) को रांची पुलिस ने पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल मंदारमनी से गिरफ्तार कर लिया है। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी लगातार फरार चल रहा था, जिसे पुलिस ने तकनीकी निगरानी और लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए दबोचा है।

दहशत और सरेआम फायरिंग की खूनी दास्तान

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुकुरहुट्टू इलाके में एक जमीन के स्वामित्व और अवैध कब्जे को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। विवाद इतना बढ़ गया कि हमलावरों ने कानून को ठेंगा दिखाते हुए सरेआम गोलियां चला दीं। सरेराह हुई इस गोलीबारी से इलाके में भगदड़ मच गई और चारों तरफ दहशत का माहौल कायम हो गया।

घटना स्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो फुटेज को पुलिस ने जांच का मुख्य आधार बनाया है। शुरुआती रिपोर्टों में आरोप है कि यह हमला पूरी योजना बनाकर किया गया था। सरेआम हथियार लहराने और फायरिंग करने की इस घटना ने राजधानी में आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

पश्चिम बंगाल तक फैला नेटवर्क, पुलिस की तड़के कार्रवाई

वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद मुख्य आरोपी महताब पुलिस से बचने के लिए राज्य की सीमा पार कर पश्चिम बंगाल भाग निकला। हालांकि, रांची पुलिस की एक विशेष टीम ने मोबाइल टावर लोकेशन, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिरों से मिले सुरागों के आधार पर मंदारमनी के एक ठिकाने पर छापेमारी की और उसे धर दबोचा।

आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर रांची लाया गया है, जहां उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब इस बात का पता लगा रही है कि फरार रहने के दौरान उसे किन-किन लोगों ने पनाह दी और अंतरराज्यीय स्तर पर उसे भागने में मदद करने वाला नेटवर्क कौन सा था।

राजनीतिक रसूख और बेखौफ जमीन माफिया का गठजोड़

इस घटना ने एक बार फिर रांची और इसके आसपास के इलाकों में फल-फूल रहे भू-माफिया और राजनीतिक संरक्षण के गठजोड़ को उजागर कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों में आरोपी के तार राजनीतिक संगठनों और स्थानीय प्रभावशाली लोगों से जुड़े होने की बात कही जा रही है। यह भी कहा जा रहा कि आरोपी होटल व्यवसाय के कारोबार से भी जुड़ा है और कांके रिंग रोड के आईटीबीपी के समीप उसका अपना होटल है, जहां से वह अपने पूरे नेटवर्क और जमीन के कारोबार को अंजाम देता था हालांकि, पुलिस का स्पष्ट कहना है कि कार्रवाई केवल दर्ज आपराधिक मामले और साक्ष्यों के आधार पर की गई है।

लेकिन यह कड़वा सच है कि कांके, रातू, पिठौरिया, नगड़ी और ओरमांझी जैसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं। जमीन के जाली कागजात तैयार करना, एक ही जमीन को कई लोगों को बेचना, और फिर बाहुबल के दम पर अवैध कब्जे के लिए गोलियां चलाना अब एक आम ढर्रा बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भू-माफिया के बढ़ते हौसलों के कारण आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

जांच के कटघरे में पुलिस प्रशासन: कई सवालों के जवाब अभी बाकी

भले ही पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया हो, लेकिन इस आपराधिक मामले में कई बेहद गंभीर और अनुत्तरित सवाल अभी भी बने हुए हैं:

  • अवैध असलहों का स्रोत: फायरिंग में इस्तेमाल किया गया हथियार कहां से आया? क्या यह गैर-कानूनी विदेशी या देसी कट्टा था?

  • कारतूसों की गिनती: मौके पर कुल कितने राउंड गोलियां चलाई गईं और क्या हथियार की बरामदगी हो सकी है?

  • मुख्य साजिशकर्ता: क्या इस खूनी खेल के पीछे केवल एक व्यक्ति का हाथ था, या फिर इसके पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है?

  • स्थानीय पुलिस की ढिलाई: क्या समय रहते जमीन विवाद की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस ने ठोस कदम नहीं उठाए?

संभावित कानूनी शिकंजा और आगे की राह

जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी, दंगा भड़काने और सार्वजनिक शांति भंग करने की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। इसके अतिरिक्त मामला आर्म्स एक्ट के कठोर प्रावधानों के तहत भी दर्ज किया गया है।

पुलिस अब आरोपी को रिमांड पर लेकर हथियार बरामद करने, बैलिस्टिक जांच पूरी करने और घटना स्थल के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज का विश्लेषण करने की तैयारी में है। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुलिस ने मजबूत चार्जशीट और पुख्ता फॉरेंसिक साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए, तो ऐसे बाहुबली अपराधी कानूनी कमियों का फायदा उठाकर आसानी से बच निकलेंगे। कांके की इस फायरिंग घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक जमीन के अवैध कारोबार और अवैध हथियारों के नेटवर्क पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक राजधानी रांची में कानून-व्यवस्था को बहाल रख पाना एक चुनौती बना रहेगा।

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