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2029 लोकसभा चुनाव लड़ेंगे Gen-Z युवा? उम्र 25 से घटाकर 21 करने की मांग

लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 से घटाकर 21 साल करने की मांग उठी है। तेलंगाना सरकार अगस्त में विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित करेगी।
चुनाव लड़ने की उम्र

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New Delhi: नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेन-जी के प्रदर्शन के बाद युवाओं की राजनीति और नीति निर्माण में भागीदारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इसी बीच तेलंगाना सरकार ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 से घटाकर 21 साल करने की मांग उठाने का फैसला किया है। अगर भविष्य में ऐसा प्रावधान लागू होता है तो 2029 के लोकसभा चुनाव तक 21 साल की उम्र पूरी करने वाले कई युवा चुनाव लड़ने के योग्य हो सकते हैं।

जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए आंदोलन में नीट पेपर लीक को लेकर युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। आंदोलनकारियों की मांगों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। हालांकि, आंदोलन की भाषा और मर्यादा को लेकर भी बहस शुरू हुई है।

तेलंगाना विधानसभा में आएगा प्रस्ताव

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने घोषणा की है कि अगस्त में राज्य विधानसभा और विधान परिषद का संयुक्त विशेष सत्र बुलाया जाएगा। इसमें लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 से घटाकर 21 साल करने की मांग वाला प्रस्ताव लाया जाएगा। इसके साथ ही राज्यसभा और विधान परिषद का चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 30 से घटाकर 25 साल करने की मांग भी प्रस्ताव में शामिल होगी। प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, ताकि संसद में जरूरी कानून लाया जा सके। हालांकि, फिलहाल यह केवल प्रस्ताव है। चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र में बदलाव के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

जेन-जी की राजनीतिक भागीदारी पर जोर

रेवंत रेड्डी का तर्क है कि जंतर-मंतर पर हुए जेन-जी के आंदोलन ने दिखाया है कि देश का युवा केवल विरोध तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि नीति निर्माण में भी भागीदारी चाहता है। उन्होंने इस मांग को कांग्रेस सरकार के पुराने फैसलों से भी जोड़ा। रेड्डी ने कहा कि 1988 में राजीव गांधी सरकार ने 61वें संविधान संशोधन के जरिए मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 साल कर दी थी। इससे करोड़ों युवाओं को पहली बार मतदान का अधिकार मिला। उन्होंने यह भी कहा कि पीवी नरसिम्हा राव सरकार के दौरान कई स्थानीय निकायों में चुनाव लड़ने की उम्र 25 से घटाकर 21 वर्ष की गई थी।

21 साल में सांसद-विधायक बनने का मौका क्यों नहीं?

रेवंत रेड्डी का कहना है कि जब युवा 21-22 साल की उम्र में आईएएस और आईपीएस बन सकते हैं, यूनिकॉर्न कंपनियां खड़ी कर सकते हैं और बड़े कॉरपोरेट चला सकते हैं तो उन्हें सांसद या विधायक बनने का अवसर भी मिलना चाहिए। आमतौर पर 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोगों को जेन-जी कहा जाता है। यही पीढ़ी अब कॉलेज, नौकरी, स्टार्टअप और डिजिटल दुनिया में सक्रिय मानी जाती है।

लोकसभा में Gen-Z की हिस्सेदारी पर भी उठाया सवाल

रेवंत रेड्डी का दावा है कि देश की करीब 30 फीसदी आबादी जेन-जी की है, जबकि 543 सदस्यीय लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व एक फीसदी से भी कम है। उनका मानना है कि इस कारण युवाओं से जुड़े मुद्दे संसद और विधानसभाओं में पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाते। उनका कहना है कि अगर युवाओं को नीति निर्माण में सीधे शामिल करना है तो उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर भी जल्दी मिलना चाहिए। तेलंगाना सरकार के प्रस्ताव के बाद चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र को लेकर यह बहस अब आगे बढ़ सकती है।

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