देशभर में 862 फास्ट ट्रैक कोर्ट, पेपर लीक मामलों का होगा त्वरित निपटारा

पीएम नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का ऐलान किया है। देश के 21 राज्यों और यूटी में 862 फास्ट ट्रैक कोर्ट संचालित हैं।
फास्ट ट्रैक कोर्ट

New Delhi: देश में पेपर लीक से जुड़े मामलों का निपटारा अब फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए किया जाएगा। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने इसका ऐलान करते हुए बताया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा दिलाने के लिए यह फैसला लिया गया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि युवाओं का हित और उनका भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

दोषियों को जल्द और कठोर सजा देने की तैयारी

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को तुरंत दंडित करने और मामलों का तय समय में निपटारा करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स गठित करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कड़े कानूनों के बावजूद कई मामले अदालतों में लंबित रहते हैं। पीड़ितों को जल्द इंसाफ दिलाने और समाज में कड़ा संदेश देने के उद्देश्य से इस सुनवाई प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया गया है।

2000 में हुई थी पहली शुरुआत

उल्लेखनीय है कि देश में सबसे पहले 11वें वित्त आयोग ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की सिफारिश की थी, जिसके बाद साल 2000 में पहली बार ऐसी अदालतें स्थापित की गई थीं। इसके बाद 14वें वित्त आयोग (2015-2020) ने देश भर में 1800 फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनाने का सुझाव दिया था, ताकि गंभीर अपराधों, महिलाओं, बच्चों और लंबे समय से पेंडिंग मामलों का त्वरित समाधान हो सके। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद केंद्र सरकार ने पॉक्सो और रेप से जुड़े मामलों के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना की शुरुआत की थी।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा फास्ट ट्रैक अदालतें

केंद्र सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 31 जनवरी 2026 तक देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 862 फास्ट ट्रैक कोर्ट काम कर रही हैं। इस सूची में सबसे ऊपर उत्तर प्रदेश है, जहां सर्वाधिक 373 एफटीसी कार्यरत्त हैं, जबकि महाराष्ट्र 105 अदालतों के साथ दूसरे स्थान पर है। इन अदालतों के गठन और संचालन के लिए केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और संबंधित राज्य सरकारें 40 प्रतिशत फंड मुहैया कराती हैं।

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