K. Durga Rao, Saraikela.
सरायकेला के कांड्रा स्थित फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में रविवार को आदिवासी सांवता सुसार अखाड़ा की ओर से आगामी विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त) के आयोजन की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान आदिवासी समाज के पारंपरिक प्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने कहा कि झारखंड का आदिवासी समाज आज धर्मांतरण, घुसपैठ और अपने अस्तित्व के संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों की जमीनों पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है, सामाजिक ताने-बाने को कमजोर किया जा रहा है तथा बहू-बेटियों की अस्मिता भी खतरे में है। उन्होंने कहा कि पाकुड़ समेत राज्य के कई जिलों में आदिवासी समाज अल्पसंख्यक हो चुका है, लेकिन सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं है।
राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए चम्पाई सोरेन ने कहा कि पेसा नियमावली के नाम पर आदिवासियों को ठगा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभाओं के गठन में पारंपरिक ग्राम प्रधानों के समानांतर वैकल्पिक व्यवस्था का प्रावधान कर ग्राम सभा की मूल भावना को कमजोर किया गया है। उन्होंने कहा कि जब ग्राम सभाओं को अपने घाटों की बालू और तालाबों की मछलियों पर भी अधिकार नहीं मिला, तब अन्य अधिकारों की बात करना निरर्थक है।
उन्होंने यह भी कहा कि पेसा नियमावली में ग्राम सभा की “अनुमति” की जगह “सहमति” तथा 30 दिनों में स्वतः स्वीकृति जैसे प्रावधान जोड़कर ग्राम सभा के अधिकारों को सीमित करने का प्रयास किया गया है। यदि ग्राम सभा निर्धारित समय के भीतर कोई निर्णय नहीं लेती, तो प्रस्ताव को स्वतः स्वीकृत मान लेने का प्रावधान ग्राम सभा की वास्तविक भूमिका को कमजोर करता है।
बैठक को संबोधित करते हुए आदिवासी सांवता सुसार अखाड़ा के संयोजक रामदास टुडू ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प दिवस है। उन्होंने बताया कि 9 अगस्त को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल होंगे और जल, जंगल, जमीन, भाषा, संस्कृति तथा अधिकारों की रक्षा का सामूहिक संकल्प लिया जाएगा। उन्होंने समाज के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने की अपील की।
बैठक में मांझी बाबा दारा सिंह सोरेन, सोनाराम मार्डी, राम हांसदा, सुजान हांसदा, पवन हांसदा, मोहन बास्के, पाइतो सोरेन, मनसा राम मुर्मू, बुद्धेश्वर मार्डी, कालीचरण सरदार, प्रधान मार्डी, भोला हेम्ब्रम, भीम हांसदा, साइमल मार्डी, रतन सोरेन, रायशन सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।





