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Islamabad: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में राजनीतिक और सामाजिक हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। शहबाज शरीफ सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ जारी उग्र विरोध प्रदर्शनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर की गई गिरफ्तारियों के बाद पूरे क्षेत्र में विद्रोह जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेताओं ने अब खुले तौर पर पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस तनाव के बीच कई सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय नागरिकों और आंदोलनकारियों द्वारा भारत से खुले समर्थन और मानवीय सहायता की अपील करने की खबरें सामने आ रही हैं।
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600 से अधिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद भड़का आक्रोश
स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल ही में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा 600 से अधिक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने और प्रमुख जननेता शौकत नवाज मीर की नजरबंदी के बाद जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस बीच आंदोलनकारी नेताओं के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे पाकिस्तान सरकार की भेदभावपूर्ण नीतियों पर तीखा हमला बोल रहे हैं। एक वायरल वीडियो में जेएएसी के वरिष्ठ नेता सरदार अमन खान ने पुंछ, राजौरी, मेंढर और डोडा जैसे भारतीय सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों से एलओसी (LoC) के पार मदद भेजने की भावुक अपील की है।
नियंत्रण रेखा (LoC) को बदलने की मांग, किसी भी हद तक जाने को तैयार
सरदार अमन खान ने अपने संबोधन में बताया कि इस समय पूरे PoK में आटा, चावल और जीवनरक्षक दवाओं की भारी किल्लत हो गई है, जिससे स्थानीय आबादी भुखमरी के कगार पर है। एक अन्य वायरल वीडियो में नेता भीड़ से नियंत्रण रेखा (एलओसी) की ओर मार्च करने और सीमाओं को लांघने की बात कहते नजर आ रहे हैं, जिस पर प्रदर्शनकारियों ने गगनभेदी नारे लगाकर अपना समर्थन जताया। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि वे अब केवल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपने बुनियादी मानवाधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
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जेएएसी के नेताओं ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना और पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को कुचलने के लिए क्रूर बल प्रयोग कर रही है। इंटरनेट और संचार सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है ताकि घाटी की आवाज बाहर न जा सके। फिलहाल पूरे PoK में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बावजूद विरोध की आग लगातार नए जिलों में फैलती जा रही है, जिससे इस्लामाबाद प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।

