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गुमला/चैनपुर:- चैनपुर प्रखंड के घोरहठी जनावल गांव में सोमवार सुबह एक 11 वर्षीय बच्ची सर्पदंश का शिकार हो गई। पीड़िता बेरोनिका तिग्गा, पिता फिल्मोन तिग्गा, आर.सी. प्राइमरी स्कूल जनावल की कक्षा पांच की छात्रा है। घटना के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) चैनपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर परिजनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
जानकारी के अनुसार, बेरोनिका रोज की तरह सुबह करीब 6:30 बजे स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी। इसी दौरान रास्ते में एक जहरीले सांप ने उसे डस लिया। घटना की सूचना मिलते ही स्कूल की प्रिंसिपल अंजली टोप्पो और बच्ची के पिता फिल्मोन तिग्गा तत्काल उसे इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चैनपुर लेकर पहुंचे।
पीड़ित बच्ची के पिता फिल्मोन तिग्गा का आरोप है कि जब वे सुबह करीब 9:30 बजे अस्पताल पहुंचे, तब वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। उनके अनुसार, अस्पताल में तैनात नर्सों और एएनएम ने मोबाइल फोन के माध्यम से डॉक्टरों से संपर्क किया और फोन पर मिले निर्देशों के आधार पर बच्ची का प्राथमिक उपचार शुरू किया।
परिजनों का कहना है कि डॉक्टर की अनुपस्थिति और इलाज में हुई देरी के कारण बच्ची की हालत लगातार गंभीर बनी रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने से भी काफी परेशानी हुई।
बाद में बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल गुमला रेफर कर दिया गया। इस बीच स्वास्थ्य व्यवस्था से नाराज पिता फिल्मोन तिग्गा ने अस्पताल में लिखित आवेदन देकर अपनी बेटी को आगे के इलाज के लिए अपनी जिम्मेदारी पर ले जाने का निर्णय लिया।
लिखित आवेदन में उन्होंने उल्लेख किया कि वे अपनी पुत्री को अपनी इच्छा से दूसरे स्थान पर इलाज के लिए ले जा रहे हैं तथा यदि रास्ते में या इलाज के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी अस्पताल के डॉक्टरों अथवा नर्सों की नहीं बल्कि स्वयं उनकी होगी।
फिलहाल बच्ची की हालत नाजुक बताई जा रही है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और समय पर उपचार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

