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Rampur: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खां को बड़ा झटका लगा है। आयकर विभाग ने उनके परिवार से जुड़े जौहर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया है। विभाग ने ट्रस्ट को अपना पक्ष रखने और आरोपों पर स्पष्टीकरण देने के लिए पर्याप्त अवसर दिया था, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।
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सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2023 में आयकर विभाग द्वारा की गई छापेमारी और उसके बाद हुई विस्तृत जांच में कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने ट्रस्ट की गतिविधियों को पंजीकरण की शर्तों के अनुरूप नहीं माना और अंततः उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया।
‘जवाब नहीं मिलने के बाद हुई कार्रवाई’
आयकर विभाग, लखनऊ के प्रधान आयुक्त (केंद्रीय) गौरव बॉथम की ओर से हाल ही में ट्रस्ट को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में विभिन्न आरोपों पर जवाब मांगा गया था और निर्धारित समयसीमा तक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया था।
बताया जा रहा है कि ट्रस्ट की ओर से विभाग को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद विभाग ने उपलब्ध दस्तावेजों, वित्तीय अभिलेखों और जांच रिपोर्ट के आधार पर पंजीकरण निरस्त करने का फैसला लिया।
जांच के दौरान विभाग ने ट्रस्ट के लेखा-जोखा, वित्तीय लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया। साथ ही राज्य सरकार की कार्रवाई, न्यायालयों की टिप्पणियों और विभिन्न रिपोर्टों का भी अध्ययन किया गया।
‘इन आरोपों को बनाया गया आधार’
आयकर विभाग की जांच में ट्रस्ट पर कई गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है। इनमें मंत्री पद पर रहते हुए कथित रूप से प्रभाव का दुरुपयोग कर जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण कराना, स्वीकृत सीमा से अधिक सरकारी भूमि पर कब्जा, भवन निर्माण लागत को कम दिखाना और बोगस डोनेशन लेने जैसे आरोप शामिल हैं।
इसके अलावा ट्रस्ट पर आय से अधिक नकदी जमा कराने, दान की राशि के स्रोतों में अनियमितता, आवश्यक विभागीय अनुमतियां नहीं लेने, अग्निशमन मानकों का पालन नहीं करने और ट्रस्ट के संचालन में परिवार के सदस्यों के अत्यधिक प्रभाव जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
आयकर विभाग का मानना है कि जांच में सामने आए तथ्यों से ट्रस्ट की गतिविधियां पंजीकरण की शर्तों के अनुरूप नहीं पाई गईं। वहीं इस कार्रवाई के बाद ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों और संपत्तियों को लेकर भी आगे जांच और कर संबंधी कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।
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गौरतलब है कि रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण जौहर ट्रस्ट के माध्यम से कराया गया था। इस पूरे मामले की शिकायत भाजपा विधायक आकाश सक्सेना द्वारा आयकर विभाग से किए जाने के बाद जांच शुरू हुई थी। अब रजिस्ट्रेशन निरस्त होने के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में आ गया है।

